वाराणसी में चलती कार में एथलीट के साथ गैंगरेप, 7 युवक गिरफ्तार!

वाराणसी में एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसमें एक एथलीट खिलाड़ी के साथ उसके बॉयफ्रेंड और उसके साथियों ने चलती कार में गैंगरेप किया। यह घटना 2 अप्रैल की रात की है जब पीड़िता को उसके बॉयफ्रेंड ने सिगरा स्थित एक हुक्का बार में ले जाकर वहां से अपने दोस्तों के साथ कार में ले गया। इसके बाद, उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे सड़क किनारे फेंककर सभी आरोपी फरार हो गए। घटना के बाद खिलाड़ी किसी भी तरह अपने घर पहुंची और अपने परिवार को सारी बात बताई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।

पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छः आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गैंगरेप की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को भी मौके पर बुलवाया। वाराणसी के लालपुर पांडेपुर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। खिलाड़ी की उम्र 18 वर्ष है और वह बी.ए. की छात्रा है। उसके पिता एक ड्राइवर हैं और यह परिवार चार बेटियों और एक बेटे का है। पीड़िता अपने माता-पिता की सबसे छोटी बेटी है।

जांच के अनुसार, पीड़िता को उसके बॉयफ्रेंड ने कार में ले जाकर पहले अपने एक साथी को बुलवाया और फिर अन्य दोस्तों को भी शामिल कर लिया। आरोपियों ने रिंग रोड पर चलते-चलते पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जब उसकी हालत बिगड़ गई, तो आरोपियों ने उसे कार से बाहर फेंक दिया। दुष्कर्म के इस मामले में पीड़िता के परिवार ने पुलिस को सूचित किया और आरोपी युवकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य की तलाश की जा रही है।

इसी बीच, पुलिस ने सिगरा के हुक्का बार में भी जांच शुरू कर दी है। डीसीपी के नेतृत्व में तीन थानों की पुलिस की टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की। परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक बेटी के साथ नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सवाल है कि क्यों हमारे समाज में ऐसी आपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सभी लोग चाहते हैं कि न्याय हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

इस घटना के साथ-साथ प्रयागराज में भी एक और घटना हुई है, जहां रामनवमी के अवसर पर कुछ युवकों ने सालार मसूद गाजी की मजार पर भगवा झंडे फहराए। इस मामले में युवक अपने आपको भाजपा कार्यकर्ता बताते हैं और उन्होंने धर्म के नाम पर नारेबाजी की। इस तरह की घटनाएँ हमारे समाज में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं। ऐसे मामलों पर प्रशासन और समाज दोनों को गंभीरता से विचार करना होगा।