बस खत्म होने को है कुर्मी-लोधी-जाट विधायकों की चमक, भास्कर सर्वे में खुलासा!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातियों की भूमिका को नकारना संभव नहीं है। दैनिक भास्कर द्वारा किए गए सर्वेक्षण के पहले भाग में यह जाना गया कि किन-किन पार्टियों के विधायकों को मतदाता अगली चुनावों में टिकट देने के खिलाफ हैं। इस भाग में हम विधायकों की परफॉर्मेंस का जातियों के अनुसार विश्लेषण करेंगे। हमने विधायकों को चार श्रेणियों में बांटा है: सामान्य, ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम। इस सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि ओबीसी वर्ग के कुर्मी, जाट और लोधी विधायकों के प्रति लोगों में सबसे अधिक नाराजगी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 75 कुर्मी विधायकों में से 95% को अगले चुनाव में टिकट देने से मना किया गया है।

सर्वेक्षण के अनुसार, मुस्लिम विधायकों में से 32 में से 84% को दोबारा टिकट देने से लोगों ने मना कर दिया। वहीं, सामान्य वर्ग के विधायकों की परफॉर्मेंस लगातार बेहतर रही है। 137 सामान्य वर्ग के विधायकों में से 26% को अगली बार फिर से टिकट मिलने की संभावना है। SC वर्ग के 6 विधायकों में से 50% से अधिक अंक पाने वाले विधायकों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा है। भाजपा के बलरामपुर से पलटूराम और हापुड़ से विजय पाल आढ़ती ने इस श्रेणी में उत्कृष्टता दिखाई। जबकि भाजपा के कुछ विधायकों ने खराब परफॉर्मेंस दर्ज की है, जैसे मिलक से राजबाला सिंह को 10% और रामकोला से विनय प्रकाश गोंड को 18% अंक मिले।

कुर्मी और ठाकुर विधायकों की परफॉर्मेंस भी अलग-अलग रही है। कुर्मी विधायकों में भाजपा के उतरौला से रामप्रताप वर्मा ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं अन्य ने अपेक्षाकृत खराब अंक प्राप्त किए। पंजाबी विधायकों का सर्वेक्षण में सबसे आसान मिलने का दावा किया गया है। 6 पंजाबी विधायकों में से 86% लोग इन्हें आसानी से मिल पाते हैं। सर्वे में यह भी स्पष्ट हुआ कि 94% एससी विधायकों के कामकाज से लोग संतुष्ट नहीं हैं। यह अविश्वसनीय आंकड़ा सपा के सभी 15 एससी विधायकों पर लागू होता है।

जब वादों की बात आती है, तो सर्वे में यह सामने आया है कि भाजपा के विधायकों ने अन्य दलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल मिलाकर, 41 विधायकों ने अपने वादे पूरे किए हैं, जिसमें से सिर्फ भाजपा के 5% एससी विधायकों ने ही वादे निभाए। प्रचारित आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि कुर्मी विधायकों की अगली बार पसंद कम है, क्योंकि उनमें से 95% को टिकट न देने की सिफारिश की गई है। इसी प्रकार लोधी और जाट समुदाय के विधायकों में से भी केवल कुछ को पुनः टिकट देने की सिफारिश की गई है।

इस रिपोर्ट में कुल 403 विधायकों के प्रदर्शन और उनकी कार्यक्षमता के चार सवालों के उत्तर दिए गए हैं: कितने विधायकों से मिलना आसान है, कितने विधायकों के काम से लोग खुश हैं, कितने विधायकों ने अपने वादे पूरे किए हैं, और कितने विधायकों को अगली बार टिकट नहीं मिलना चाहिए। इस सर्वेक्षण में ठाकुर विधायकों का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ पाया गया, जबकि एससी और लोधी श्रेणी के विधायकों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। कल हम इस अन्वेषण के अंतिम भाग का अध्ययन करेंगे, जिसमें सीएम और उनके मंत्रियों का प्रदर्शन भी शामिल होगा।