क्या यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन में होगी दरार? राहुल के 200 सीटों की मांग से बढ़ी हलचल!

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में इन दिनों कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। कांग्रेस के पश्चिमी यूपी के सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि 80 में 17 का फॉर्मूला अब कांग्रेस के लिए लागू नहीं रहेगा। उनका कहना है कि इस बार उनका लक्ष्य किसी को जिताना या हराना नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी के आधार को फिर से मजबूती प्रदान करना है। उनका ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्षों की नई सूची में पिछड़ों के बाद मुस्लिम नेताओं को अधिक महत्व दिया है। इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि क्या सपा-कांग्रेस का गठबंधन अब कमजोर पड़ता दिख रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा को लाभ हो सकता है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। इसके संकेत पिछले कुछ समय में देखने को मिले हैं। जैसे कि संभल की हिंसा के बाद, जब राहुल और प्रियंका गांधी वहां जाने की कोशिश कर रहे थे, सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने अप्रत्यक्ष तौर पर इसे लेकर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि जो लोग वहां जा सकते थे, उन्हें इसे करने दिया जाना चाहिए था, जिससे स्थिति बेहतर हो सकती थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन के भीतर आपसी मतभेद उत्पन्न हो रहे हैं। इसके अलावा, सपा ने उपचुनाव में भी केवल दो सीटें जीतने के बाद यह संकेत दिया है कि वह कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2017 और 2024 के चुनाव परिणामों को देखें तो सपा को अधिक लाभ हुआ है। सपा का जीत का स्ट्राइक रेट कांग्रेस की तुलना में काफी बेहतर रहा है। वहीं, कांग्रेस ने संकीर्ण सीटों पर चुनाव लड़ने के कारण अपने कार्यकर्ताओं को भी दूर किया है। हालात यह हैं कि कांग्रेस के चुनावी दावे भले ही वोट शेयर में दर्शाए गए हों, लेकिन सपा के साथ गठबंधन ने उसकी राजनीतिक स्थिति को फिर से जीवित किया है। अगर इस गठबंधन का अंत होता है तो इससे भाजपा को सीधे तौर पर फायदा हो सकता है।

कांग्रेस ने अब अपनी रणनीति में बदलाव किया है और संगठन को मजबूत बनाने में जुट गई है। हाल ही में पार्टी ने 134 जिला अध्यक्षों की सूची जारी की है, जिसमें उन्होंने ओबीसी, मुस्लिमों और दलितों को प्राथमिकता दी है। कांग्रेस यह स्पष्ट कर रही है कि वह अपने ऐतिहासिक फॉर्मूले पर लौट रही है। पार्टी के रणनीतिकार इमरान मसूद का कहना है कि आगे बढ़ते हुए सपा को कांग्रेस की जरूरत होगी, न कि इसके विपरीत। जिन सीटों को लेकर समझौते की बातें हो रही हैं, उनका जिक्र करते हुए, मसूद ने यह भी कहा कि कांग्रेस अब सम्मानजनक सीटों के लिए मजबूती से खड़ी होगी।

कुल मिलाकर, सपा-कांग्रेस गठबंधन में दरार की स्थिति अपने ऊपरी स्तर पर पहुंच रही है। गांधी परिवार की ओर से गठबंधन पर कोई निर्भरता नहीं दिख रही, जबकि सपा भी अपनी पहचान को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अगर ये दोनों पार्टियाँ अपने-अपने रास्ते जाती हैं, तो इस स्थिति में भाजपा को सीधा लाभ हो सकता है। आने वाला समय यह तय करेगा कि क्या ये दो दल फिर से जुटने का प्रयास करेंगे या अपनी-अपनी राह पर चलेंगे।