राजस्थान के इतिहास का खुलासा: जेसेलमेर में विशाल प्राचीन समुद्र, पांडवों का रहस्यमय अज्ञातवास

30 मार्च 1949 के दिन को भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार नवसंवत्सर या चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में जाना जाता है। यह दिन राजस्थान राज्य के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन 19 रियासतों और 3 ठिकानों का विलय कर एक नया राज्य राजस्थान स्थापित हुआ था। यह घटना 76 वर्ष पुरानी है, लेकिन राजस्थान का इतिहास सदियों पुराना है। यह भूमि जिनमें प्राचीन समुद्र और फिर बाद में रेगिस्तान बने, डायनासोर जैसी प्रागैतिहासिक जीवों का निवास भी रही है। महाभारत काल में पांडवों ने भी इस भूमि पर अज्ञातवास बिताया था। इस वर्ष से राजस्थान दिवस को और विशेष बनाया जाएगा, जिसे हर साल नवसंवत्सर के दिन मनाया जाएगा।

राजस्थान का जैसलमेर क्षेत्र आज भी प्राचीन समुद्र के अस्तित्व को दर्शाता है। लाखों वर्ष पहले, यह क्षेत्र टेथिस सागर का हिस्सा था, जिसकी गहराई आज भी इस क्षेत्र में मौजूद जीवाश्मों में दिखाई देती है। वैज्ञानिकों ने जैसलमेर में विश्व के सबसे पुराने शाकाहारी डायनासोर ‘थारोसोरस इंडिकस’ के जीवाश्मों के खोज का दावा किया है, जो कि चीन में मिले जीवाश्मों से भी प्राचीन है। इस प्रकार, जैसलमेर सिर्फ रेगिस्तान ही नहीं, बल्कि प्राचीन जीवों का केंद्र भी रहा है।

राजस्थान के महाकवि गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त का हिस्सा भी इस क्षेत्र के गौरवमयी इतिहास में है। जो भीनमाल में जन्मे थे, उन्हीं को शून्य का आविष्कारक माना जाता है। ब्रह्मगुप्त ने अपने ग्रंथ ‘ब्रह्मस्फुट’ में शून्य को अंक के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी वैज्ञानिक खोजों का प्रभाव पूरी दुनिया में फैला, जहां उनके ग्रंथों का अरबी में अनुवाद भी हुआ। ऐसा कहा जाता है कि आज तक उनके सिद्धांत गणितीय विमर्शों में महत्व रखते हैं।

महाभारत काल में पांडवों का अज्ञातवास राजस्थान की विराट नगर नामक जगह पर हुआ था। यहां पांडवों ने न केवल अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए बल्कि विराट नरेश की सेवा भी की। पांडवों का यह अज्ञातवास राजस्थान के विरासत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान के राजा मालदेव और बादशाह शेरशाह सूरी के युद्ध की कहानियों में वीरता और साहस के किस्से बिखरे हुए हैं।

राजस्थान को स्वतंत्रता के पूर्व राजपूताना के नाम से जाना जाता था। यहां के राजाओं की वीरता की वजह से यह क्षेत्र हमेशा से ही विशेष रहा है। अंग्रेजों के समय में कर्नल टॉड ने इस भूमि को ‘राजस्थान’ के नाम से दस्तावेज में दर्ज किया। आज, 19 रियासतों के मिलन से बना राजस्थान भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जिसमें जयपुर की रियासत जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ी थी।

सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वीपी मेनन के प्रयासों से राजस्थान की रियासतों का विलय संभव हो सका। जिसने जोधपुर और अन्य राजधानियों के महाराजाओं को पाकिस्तान के प्रस्ताव से बचाया। जोधपुर में पाकिस्तान की वायुसेना की कमान का प्रस्ताव आया, जिसे ठुकराने के बाद जोधपुर राजस्थान का हिस्सा बना। 30 मार्च 1949 को राजस्थान राज्य की स्थापना की गई, जिसमें उप प्रधानमंत्री और रियासती मंत्रालय के अध्यक्ष सरदार पटेल ने शपथ समारोह का नेतृत्व किया। इस प्रकार, राजस्थान का इतिहास न केवल समृद्ध है, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह भी है।