लुधियाना में 16 पुलिस कर्मियों पर छंटनी की तलवार, नोटिस जारी!
पंजाब पुलिस ने 24 दिन पहले भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक प्रभावी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत 52 पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है, जो लंबे समय से अपनी ड्यूटी पर गैरमौजूद थे। इनमें से कई पुलिस कर्मियों को पहले ही व्यवस्था द्वारा नोटिस भेजे गए थे। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में एक इंस्पेक्टर, 5 सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), 4 हेड कॉन्स्टेबल (एचसी) और 42 कॉन्स्टेबल शामिल हैं।
इसके अलावा, लुधियाना के चार पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद, विभाग ने 16 और कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें से कुछ पुलिस कर्मी पिछले एक साल से लापता हैं और चार पुलिस कर्मियों पर हत्या, छीना-झपटी और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप हैं। इन आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद निलंबित किया गया था।
इस मामले में लगे आरोपों की विस्तृत जानकारी दर्शाती है कि जैसे कॉन्स्टेबल सुखविंदर सिंह पर एक हत्या का मामला दर्ज किया गया था, जिसमें उसने अपनी महिला मित्र की हत्या की। इसी प्रकार, एएसआई चरणजीत सिंह पर एक होटल व्यवसायी से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल रंजीत सिंह पर भी रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, कॉन्स्टेबल मनजीत सिंह पर स्नैचिंग का मामला कायम किया गया है।
पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहना एक गंभीर कदाचार है और ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजकर बर्खास्त कर दिया जाता है। पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि विभाग भ्रष्टाचार को लेकर कितनी गंभीरता से कार्य कर रहा है। हाल ही में बर्खास्त किए गए इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह भी भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी पाए गए हैं।
इस संदर्भ में, विभाग ने और भी बर्खास्तगी की प्रक्रिया आरंभ की है, जिसमें हेड कॉन्स्टेबल अनिल कुमार जैसे अधिकारी शामिल हैं, जो ड्रग तस्करी के प्रकरण का सामना कर रहे हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि पंजाब पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर अमल कर रही है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है जो विभाग की छवि को धूमिल कर रहे हैं। इस तरह के कदम भविष्य में पुलिस व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।









