बब्बू मान का बड़ा बयान: “सरकार बंद करे वेपन लाइसेंस, बाहुबली-पुष्पा में 100 कत्लेआम!”
हरियाणा में हाल ही में गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले गानों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है, जिसने हरियाणवी संगीत उद्योग में बवाल खड़ा कर दिया है। इस मामले में अब पंजाबी गायक बब्बू मान ने भी अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि मासूम शर्मा और अन्य कलाकारों के गानों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। एक समाचार चैनल से बातचीत करते हुए बब्बू मान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 15 वर्ष पहले हरियाणा के युवा उनकी मुलाकात के लिए आते थे और वह उन्हें फोक संगीत गाने के लिए प्रोत्साहित करते थे। अब जब हरियाणा के युवा भी अच्छे गायक और रैपर बन गए हैं, ऐसे में इन्हें प्रतिबंधित करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर गाने गलत हैं, तो फिर फिल्मों जैसे ‘बाहुबली’ और ‘पुष्पा’ को क्यों सेंसर बोर्ड द्वारा पास किया जाता है, जिनमें हिंसा दिखाई जाती है।
मासूम शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सत्र में कहा था कि उनके गाने को यूट्यूब से बैन कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार चाहती है कि गन कल्चर पर आधारित गाने न बनें, तो वह इसके लिए सहमत हैं, लेकिन कार्रवाई निस्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उनके गानों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि यूट्यूब पर ऐसे हजारों गाने मौजूद हैं। अगर यह भेदभाव जारी रहता है तो हरियाणवी संगीत उद्योग का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
बब्बू मान ने यह भी कहा कि यदि गन कल्चर पर काबू पाने का प्रयास हो रहा है, तो सरकार को हथियारों के लाइसेंस पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव पर जोर देते हुए कहा कि गाने सुनने से कोई अपराधी नहीं बनता, और हरियाणा के युवा अक्सर पंजाबी गानों को पसंद करते हैं। इस बीच, कई अन्य हरियाणवी गायकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
इस विवाद ने केवल हरियाणवी संगीत को नहीं, बल्कि पूरे पंजाब और हरियाणा की युवा संस्कृति को प्रभावित किया है। हरियाणवी गायकों का यह मानना है कि उनके काम को एकतरफा रूप से रोकना उचित नहीं है। अन्य कलाकारों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है।
कुल मिलाकर, हरियाणा में गन कल्चर पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय गायक समुदाय में असंतोष का कारण बना है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे सरकार इस मुद्दे पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देती है। क्या यह विवाद हरियाणवी संगीत की धारा को और भी मजबूत करेगा या इसे कमजोर बना देगा, यह निकट भविष्य में स्पष्ट होगा।









