विधायक-मंत्री में तीखी बहस: नाले की चौड़ाई पर कोर्ट के निर्देश का करेंगे इंतजार!

शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान जताए गए मुद्दे ने एक बार फिर Aufmerksamkeit का केंद्र बना दिया, जब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा और मालवीयनगर विधायक कालीचरण सराफ के बीच शहर के करतारपुरा नाले को लेकर गरमागरम बहस हो गई। कालीचरण सराफ ने करतारपुरा नाले से जुड़े मामले को उठाने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सवाल उठाया कि नाले का आउट-फॉल 25 मीटर है, फिर कच्चे नाले की चौड़ाई 30 मीटर क्यों की जा रही है। इस मुद्दे पर जेडीए द्वारा 500 मकानों पर लाल निशान लगाने से स्थानीय लोगों बीच चिंता और दहशत का माहौल बन गया है। सराफ ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी सूरत में इन मकानों को तोड़ने की अनुमति नहीं देंगे।

मंत्री खर्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ही होगी। इस दौरान दोनों में बहस बढ़ती चली गई, जिसे देखते हुए विधानसभा के स्पीकर को बीच में आना पड़ा। उल्लेखनीय है कि दोनों विधायक भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखते हैं और करतारपुरा नाले का क्षेत्र कालीचरण सराफ के विधानसभा क्षेत्र में आता है।

स्थानीय नागरिक करतारपुरा नाले की चौड़ाई बढ़ाने के निर्णय के खिलाफ पिछले 5 दिनों से विरोध कर रहे हैं। जेडीए द्वारा नाले के दोनों तरफ के पक्के मकानों पर लाल निशान लगाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, और शनिवार देर रात एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो जाने की सूचना के बाद लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है। स्वेज फार्म संयुक्त महासंघ के अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि करतारपुरा नाला शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में है और इसकी लंबाई लगभग 4.25 किमी है। 2015 में हाईकोर्ट में जेडीए द्वारा प्रस्तुत नक्शा नाले की चौड़ाई 20 मीटर दर्शाता है, जबकि अब इसे 100 फीट करने का प्रस्ताव है, जिससे प्रभावित होने वाले मोहल्लों की संख्या एक हजार तक पहुँच सकती है।

एक बार फिर विधायक कालीचरण सराफ ने स्थानीय स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर गए और करतारपुरा नाले की डिमार्केशन और सीवरेज लाइन डालने के मुद्दे पर जोर दिया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब आउट-फॉल की चौड़ाई केवल 25 मीटर है, तो नाले की चौड़ाई 30 मीटर करने की आवश्यकता क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि जेडीए द्वारा 500 मकानों पर लाल निशान लगाने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया है।

इस पर मंत्री खर्रा ने सफाई दी कि नाले की कुल लंबाई 11.4 किमी है, जिसमें 6.6 किमी पक्का और 4.8 किमी कच्चा नाला है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में कार्रवाई उन कॉलोनियों पर की जाएगी, जो नाले के दोनों तरफ स्थित हैं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण से निपटने के लिए नियमों के अनुसार संज्ञान लिया जा रहा है, और इस संबंध में अदालत में जनहित याचिका विचाराधीन है। इस मुद्दे पर स्थायी समाधान के लिए सही दिशानिर्देशों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।