काशी में 150 करोड़ की रुद्राक्ष-खरीदारी: महाकुंभ में 30 करोड़ के चंदन टीके!

काशी में इस बार महाशिवरात्रि और महाकुंभ का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ श्रद्धालुओं की अद्भुत भीड़ उमड़ी। महाकुंभ में अर्जित होने वाले विशाल आंकड़ों की तुलना में काशी ने अपने आध्यात्मिक आकर्षण और गुणों द्वारा कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित किए। 45 दिन के इस महोत्सव में कुल 4.32 करोड़ श्रद्धालु काशी पहुंचे, जिनमें से 1 लाख विदेशी श्रद्धालु भी शामिल थे। यह अनुभव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि आर्थिक रूप से भी काशी के लिए लाभदायक साबित हुआ। एकत्रित व्यापार आंकड़ों के अनुसार, रुद्राक्ष की बिक्री अकेले 100 करोड़ तक पहुँच गई, जबकि 30 करोड़ के चंदन के टीके श्रद्धालुओं को लगाए गए।

कृष्णा जोन का माहौल शहर की हर गली में गूंजता रहा, जहाँ हर दिन लगभग पाँच लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। इस साल, श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल की महाशिवरात्रि से लगभग दोगुनी रही। सबसे अधिक मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, और उत्तराखंड से लोग काशी पहुंचे। विभिन्न राज्यों और देशों से आए इन श्रद्धालुओं के लिए होटलों द्वारा विशेष सुविधाएँ मुहैया कराई गईं, जिसमें शहर के नो-व्हीकल जोन के कारण स्टाफ को बाइक से मेहमानों को होटल तक पहुँचाने का काम किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि महाशिवरात्रि पर पहले बार बाबा विश्वनाथ के दर्शन 43 घंटे तक निरंतर हुए। उन्होंने कहा कि होटल और ढाबों ने भी अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दीं। जिन व्यवसायों ने पहले सामान्य सामान बेचा, अब उन्होंने भोजनालय का संचालन शुरू कर दिया। जनरल स्टोर मालिक आरती माहेश्वरी ने बताया कि पहले तो वे Snacks बेचते थे, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान श्रद्धालुओं के लिए गर्म भोजन पर है। विशेषकर, 100 रुपये की थाली का भोजन श्रद्धालुओं के लिए एक आकर्षण बन गया है।

बाजार में रात को भी दुकानें खुली रहीं, जहां रुद्राक्ष और अन्य धार्मिक सामग्री की बिक्री बढ़ गई। कई व्यापारियों ने बताया कि उन्हें पहले से कहीं ज्यादा ग्राहक मिले, और स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बनी। नाविकों ने भी इस मौके का फ़ायदा उठाया, क्योंकि घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई थी। नाव की दरें आधिकारिक रूप से तय की गई थीं, लेकिन कई नाविक कम कीमत पर सवारी प्रदान कर रहे थे।

काशी की इस महान आस्था के आयोजन का यह उत्साह और प्रसाद से लेकर टीके तक का अनुभव, सभी के लिए अद्वितीय रहा। काशी में इतनी भीड़ के साथ, पंडितों ने भी श्रद्धालुओं का सहारा दिया और सौम्य प्रयासों से उन्हें संबोधित किया। CEO विश्व भूषण मिश्र ने भी दर्शकों को ऑनलाइन दर्शन की सलाह दी, ताकि भीड़ प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। इस बीच, महाकुंभ द्वारा काशी के नागरिकों और व्यापारियों को भौतिक और आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त हुआ। काशी, जो शिव की ताजगी के साथ जानी जाती है, ने इस बार फिर से अपनी आस्था और समृद्धि को दर्शाया है।