बीकानेरी पापड़ का राज: पाकिस्तानी ‘साजी’ से 1500 साल पुराना तरीका, दुनियाभर में धूम मचा रहा!
बीकानेर का पापड़ भारतीय खाने की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे सदियों से सब्जियों के साथ परोसा जाता है। इस पापड़ की विशेषता केवल इसके स्वाद में नहीं, बल्कि इसके इतिहास में भी समाहित है। बीकानेर में पापड़ बनाने का कार्य लगभग 1500 साल पुराना है और यह एक पारंपरिक व्यंजन है। सदियों से लोग बीकानेर में पापड़ बनाकर इसका आनंद ले रहे हैं। यह विशेष रूप से उड़द और मूंग की दाल से तैयार किया जाता है, जो न केवल स्वाद में अद्भुत होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।
बीकानेर में पापड़ बनाने की प्रक्रिया बहुत ही पारंपरिक तरीके से की जाती है। यहां 400 से अधिक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जहां सुबह से लेकर रात तक पापड़ तैयार किए जाते हैं। विधि में आज भी हाथ से बेलने की कला महत्वपूर्ण है। जैसे ही महिलाएं अपने घरों में पापड़ बेलती हैं, यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर एक पापड़ में विशेष साजी खार का पाउडर मिलाया जाए, जो न केवल पापड़ को कुरकुरा बनाता है, बल्कि उसका स्वाद भी बढ़ाता है। बीकानेरी पापड़ के लिए ये खास साजी खार पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आता है, जो इसे और भी खास बनाता है।
यहां के पापड़ में उपयोग होने वाले मसाले और दालें इसकी खासियत हैं। मुख्य रूप से उड़द और मूंग की दाल के साथ काली मिर्च, नमक, जावित्री, जायफल और शाही जीरा जैसे ताजे मसाले भी मिलाए जाते हैं। बीकानेरी पापड़ की एक और खास बात यह है कि इसे बिना साजी खार के नहीं बनाया जा सकता, जो इसे अपने आप में अनूठा बनाता है। जब पापड़ को बेलने के लिए आटा गूंथा जाता है, तो साजी के पानी का प्रयोग किया जाता है, जिससे इसके स्वाद और कुरकुरेपन में इजाफा होता है।
पापड़ बनाना केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि यह बीकानेर के लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा साधन है। यहां की पापड़ उद्योग से लगभग 20,000 लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं। इन महिलाओं की मेहनत और कुशलता पापड़ की गुणवत्ता को सुनिश्चित करती है। बीकानेर से तैयार पापड़ का निर्यात देश के विभिन्न हिस्सों में होता है, साथ ही यह दुबई और अन्य खाड़ी देशों में भी काफी लोकप्रिय है। यहाँ हर दिन लगभग 12,000 टन पापड़ का उत्पादन होता है, जो इसकी व्यापक मांग को दर्शाता है।
इस तरह से बीकानेर का पापड़ न केवल खाने में लजीज होता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कुकिंग विधियों की एक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। चाहे वह घर का खाना हो या शादी या पर्व-त्यौहार, बीकानेरी पापड़ हर जगह की थाली का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि लोग कहते हैं “बिन पापड़ सब सून”, जो इस विशेष खाद्य वस्तु की मूल्य को दर्शाता है। बीकानेर का पापड़, जिसका सामर्थ्य केवल स्वाद में नहीं, बल्कि उसके पीछे की मेहनत और कहानी में भी है, एक अद्वितीय धरोहर है जिसे संरक्षित रखना आवश्यक है।









