“लैला मजनू का थिएटर से हटना: 15 साल के संघर्ष के बाद आई फिल्म को झटका!”

अविनाश तिवारी, जो भारतीय सिनेमा के एक उभरते हुए कलाकार हैं, ने हाल ही में एक दिल छू लेने वाली कहानी साझा की है कि कैसे उन्होंने अपने करियर में 15 वर्षों तक संघर्ष किया और अंततः अपनी पहली फिल्म “लैला मजनू” के लिए चुने गए। लेकिन दुर्भाग्यवश, फिल्म की रिलीज के केवल तीन दिन बाद ही इसे सिनेमाघरों से हटा दिया गया। अविनाश ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा, “इस एक फिल्म को पाने में मुझे बहुत मेहनत और समय लगा। जब फिल्म को इतनी जल्दी हटा दिया गया, तो मैं बेहद निराश हो गया था और सोचने लगा कि अब मुझे क्या करना चाहिए। क्या मुझे फिर से किसी अन्य फिल्म के लिए प्रयास करना चाहिए?” ये शब्द उन्होंने हॉलीवुड रिपोर्टर के साथ अपने इंटरव्यू में कहे।

अविनाश ने अपने करियर की शुरुआत में कई बाधाओं का सामना किया, चाहे वह अभिनय की पढ़ाई हो या काम की तलाश। उन्होंने एक अभिनय डिग्री हासिल की और खुद को तैयार करने के लिए न्यूयॉर्क गए। वापसी के बाद, उन्हें लगा कि वे इस क्षेत्र के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी उम्मीदें सही नहीं थीं। उन्होंने बताया, “मैंने 2007 में सोचा था कि मेरे लिए रेड कार्पेट की यात्रा होगी, लेकिन सच यह है कि मुझे इसके लिए लड़ना पड़ा। मुझे नहीं पता था कि मुझे आगे बढ़ने के लिए कहां जाना है।”

अविनाश ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, “मैं स्टूडियो में अपने पोर्टफोलियो या तस्वीरें छोड़ने से बचता था। मुझे पता था कि वे अक्सर रिजेक्ट हो जाते थे और इसीलिए मैंने डीवीडी बनाकर उन्हें दिखाने की कोशिश की। मैं फिल्में करना चाहता था, लेकिन उस समय मुझे काम नहीं मिल पाता था।” इस प्रकार, उन्होंने अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए एक अलग रास्ता चुना।

हालांकि, “लैला मजनू” की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 2018 में रिलीज होने के बाद, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई थी, लेकिन छह साल बाद इसे पुनः रिलीज किया गया। यह पुनः रिलीज पहले से कहीं अधिक सफल रही, और फिल्म ने 8.85 करोड़ रुपए की कमाई की। जबकि पहली रिलीज में, फिल्म का कलेक्शन मात्र 3.25 करोड़ रुपए था। इस सफलता ने दर्शाया कि कभी-कभी संघर्षों के बीच सफलता की किरणें भी छिपी होती हैं, जिसे समय के साथ पहचाना जा सकता है।

इस प्रकार, अविनाश तिवारी का अनुभव यह बताता है कि सफलता की राह में संघर्ष और धैर्य का बड़ा स्थान होता है। उनके प्रयास और लगन ने न केवल उन्हें एक स्टार की ओर अग्रसर किया, बल्कि यह भी साबित किया कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। अविनाश की कहानी आने वाले कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है।