चंडीगढ़: सफाई कर्मचारियों की स्थायित्व की माँग, मेयर बोलीं – ड्राफ्ट तैयार करें!

चंडीगढ़ के मेयर हरप्रीत का कार्यकाल शुरू होते ही उनके पास कामकाजी लोगों का ताँता लगा रहा। बुधवार को, पूर्व निर्धारित समय पर, उन्होंने शहर के विभिन्न नागरिकों से मिलने का समय रखा था। इस दौरान, अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और चंडीगढ़ प्रदेशाध्यक्ष ने उनके समक्ष कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इन में मुख्य रूप से एमसी कार्यालय में कार्यरत स्थायी सफाई कर्मचारियों की मौत के बाद उनके स्थान पर भर्ती किए जा रहे कर्मचारियों से संबंधित मुद्दे शामिल थे। मोर्चा के अध्यक्ष अमित खैरवाल ने स्पष्ट किया कि करीब 250 से 300 मामलों को निपटाने के लिए मेयर की सहायता की आवश्यकता है।

मेयर हरप्रीत ने बैठक में कहा कि वे इन मांगों पर ध्यान देंगी, और इसके लिए मोर्चा के सदस्यों से एक ड्राफ्ट और प्रेजेंटेशन तैयार करने को कहा। इसके बाद ही वे इस मुद्दे पर गहराई से सोच पाएंगी। इसके अलावा, उन्होंने डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के साथ मिलकर चंडीगढ़ की विकास की दिशा में काम करने का आश्वासन दिया। हरप्रीत ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी का उद्देश्य चंडीगढ़ को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की तल्खी केवल अफवाह है।

इसके अलावा, मेयर ने गवर्नर के साथ अपनी मुलाकात के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह मीटिंग बहुत सकारात्मक रही है और उन्हें गर्व है कि वे गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने बताया कि गवर्नर से उन्होंने लाल डोरे के अंतर्गत आने वाले मकानों को बिजली और पानी उपलब्ध कराने की दिशा में भी बात की। हालांकि, नयागांव को चंडीगढ़ का हिस्सा बनाने का मुद्दा उन्होंने टाल दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा अभी प्राथमिकता में नहीं है।

मेयर ने चंडीगढ़ की सफाई स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे इस पहलू को लेकर गंभीर हैं और प्रयास कर रही हैं कि चंडीगढ़ को देश के सबसे साफ शहरों की सूची में शामिल कराया जा सके। इस उद्देश्य के लिए, उन्होंने कड़े प्रयास करने का निर्णय लिया है ताकि शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। वे चाहती हैं कि नागरिकों को एक स्वच्छ और स्वस्थ जीवन का अनुभव हो और इसके लिए सभी को मिलकर काम करना पड़ेगा।

उपरोक्त चर्चा से स्पष्ट है कि चंडीगढ़ की मेयर हरप्रीत नगर की समस्याओं को गंभीरता से ले रही हैं और उन पर ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वे न केवल अनुसूचित जाति मोर्चा की मांगों को सुन रही हैं, बल्कि शहर के विकास में सभी पक्षों के सहयोग को भी आवश्यक मानती हैं। इस तरह की बातचीत से उम्मीद जगी है कि चंडीगढ़ आने वाले दिनों में एक और विकसित एवं स्वच्छ शहर में परिवर्तित हो सकेगा।