फरीदकोट: प्रमोशन की मांग को लेकर टीचर्स का हंगामा, अब शिक्षा मंत्री आवास की ओर रुख!

फरीदकोट में, सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब और डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के नेतृत्व में, 12 जिलों से आए सैकड़ों शिक्षकों ने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के पैतृक गांव में एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी। अध्यापक संगठनों के नेता, जैसे कि दिग्विजय पाल सिंह और सुखविंदर सिंह चाहल, ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जबकि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मिडिल स्कूलों को बंद किया जा रहा है।

शिक्षकों ने यह भी बताया कि प्रमोशन में खाली पदों को छिपाया जा रहा है और उन्हें दूर-दराज के जिलों में भेजा जा रहा है। इसके अलावा, कंप्यूटर शिक्षकों और कार्यालय कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सीएडवी टीचर के ग्रेड घटाने की भी शिकायत की गई है। इसके साथ ही, पुरानी पेंशन योजना और ग्रामीण भत्ते को बहाल नहीं किया गया है। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की तीन किस्तें और साढ़े पांच साल का बकाया अब तक नहीं मिला है, जिससे शिक्षकों में जुड़ाव की भावना कम हो रही है।

इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस समस्याओं के समाधान में टालमटोल कर रहे हैं। कई जिलों के शिक्षक नेताओं ने यह उल्लेख किया कि यदि सरकार उनके मुद्दों का जल्द समाधान नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने 19 जनवरी को शिक्षा मंत्री के गांव गंभीरपुर में एक बड़ी रैली आयोजित करने का ऐलान किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि 18 जनवरी को लुधियाना में पंजाब कर्मचारी एवं पेंशनर्स सांझा मोर्चा की बैठक की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति निर्धारित की जाएगी। शिक्षकों की एकजुटता और उनके द्वारा प्रदर्शन में दिखाए गए समर्पण से यह स्पष्ट है कि वे अपने हक की लड़ाई को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने एक स्वर में यह कहा कि वे बिना उचित सम्मान और अधिकारों के नहीं रुकेंगे।

सामूहिक विचार व्यक्त करते हुए, शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को उठाने का आश्वासन दिया है। वे जानते हैं कि शिक्षा के अधिकार और उनकी जरूरतों को नजरअंदाज होना कोई विकल्प नहीं है। यह सामूहिक प्रदर्शन न केवल उनके संघटन की ताकत को प्रदर्शित करता है, बल्कि अध्यापक समुदाय के समक्ष आ रही चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाने में भी मदद करता है।