कुम्भ में पड़ी थी बीएचयू की नींव, महामना ने लिया था अनूठा संकल्प
कुम्भ में पड़ी थी बीएचयू की नींव, महामना ने लिया था अनूठा संकल्प
महाकुम्भ नगर, 24 जनवरी (हि. स.)। धर्म-अध्यात्म के सतत संदेश के साथ कुम्भ से कई ऐसे संकल्प और निर्णय लिए गए। जिसने बाद में आधुनिक भारत को गढ़ने में मदद की। शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में जाना गया बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की नींव भी इसी कुम्भ में रखी गई। यही नहीं महामना मदन मोहन मालवीय ने अपने इस सपने को पूरा करने का अनूठा संकल्प भी यहीं से लिया था।
आधुनिक इतिहास के प्रोफेसर डॉ. भूपेश सिंह के अनुसार सन् १९०६ में प्रयाग में कुम्भ मेला लगा था। देश भर से साधु सन्यासी और महात्मा पधारे थे। इसी कुम्भ में एक विद्वत परिषद की सभा भी आहूत की गई थी। भूपेश सिंह के अनुसार इस सभा में भारत भर के कई बड़े संत-महात्मा और विद्वानों ने भाग लिया था। संगम तट पर हुई इसी सभा मे मालवीय जी ने विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उस विशाल विद्वत सभा ने मालवीय जी के इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया और कार्यान्वयन के लिए एक समिति भी गठित कर दी गई, जिसका विवरण विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी मिलता है।
इस प्रकार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय नींव इसी कुम्भ में पड़ गई। यही नहीं महामना को विश्वविद्यालय के लिए सबसे दान लेने की प्रेरणा भी इसी कुम्भ में मिली। प्रसिद्ध सर्वोदयी नेता व लेखक रवीन्द्र सिंह चौहान कहते हैं सभा में जब विश्वविद्यालय के लिए धन कैसे संग्रह किया जाय, इस बात की चर्चा हो रही थी। तभी सभा मे मौजूद एक वृद्ध महिला आगे आई और उसने महामना के हाथ मे एक पैसा रख दिया। यह देखकर मालवीय जी बहुत भावुक हो गए। इसी एक घटना से उन्होंने संकल्प ले लिया और भिक्षा पात्र लेकर गांव-गांव, नगर-नगर घूमने लगे। किसी ने एक रुपया दिया तो किसी ने लाख रुपये। बूंदों से सरोवर भरने लगा और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।









