दुर्गियाना तीर्थ से हिंदुओं ने निकाला रोष मार्च, बांग्लादेश संहार के खिलाफ अमृतसर में गरजी आवाजें!

अमृतसर जिले में स्थित श्री दुर्गियाना तीर्थ के बाहर सैकड़ों की संख्या में सामाजिक और धार्मिक संगठन एकत्रित हुए और बांग्लादेश में हो रहे नरसंहार के खिलाफ एक रोष मार्च निकाला गया। इस मार्च का उद्देश्य बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के प्रति जागरूकता फैलाना और एकता का संदेश देना था। इस मौके पर आयोजित मार्च में शामिल लोगों ने नारे लगाए कि “हम सब एक हैं, तो सेफ हैं।” इसकी अगुआई श्री दुर्गियाना कमेटी की प्रधान और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने की। उन्होंने बांग्लादेश में कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं पर किए जा रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की और कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

मार्च में शामिल अश्लीन महाराज ने भी अपनी बातों में कहा कि हिंदुओं ने बांग्लादेश में कट्टरपंथियों को घर और भोजन दिया, लेकिन अब वही लोग हिंदुओं के लिए खतरा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी, और अब उस देश के लोग हमारे अपने ही देश के नागरिकों पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि अब बातचीत का समय समाप्त हो चुका है और उन्हें बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को स्पष्ट भाषाश में समझाना चाहिए। उनकी बात में यह भी आया कि लगभग दो करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिये भारत में मौजूद हैं, और इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस मार्च में विद्यार्थियों, कर्मचारियों, अध्यापकों, डॉक्टरों, वकीलों और किसानों ने भाग लिया। इस प्रकार के आयोजन में विशेषकर युवा वर्ग को आमंत्रित किया गया था, और उन्होंने बड़ी संख्या में इसका समर्थन किया। मार्च श्री दुर्गियाना तीर्थ से प्रारंभ हुआ, जो हॉल बाजार होते हुए जलियांवाला बाग गया और फिर वापस श्री दुर्गियाना तीर्थ पर खत्म हुआ। इस दौरान सभी ने अपने हाथों में तख्तियां पकड़ी हुई थीं, जिन पर लिखा था “जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू सिख भाई-भाई।”

मार्च में शामिल संगठनों के नेताओं ने यह भी कहा कि बांग्लादेश को पिछले समय में पाकिस्तान के चंगुल से मुक्त किया गया था, लेकिन अब वही देश हमारे अपने नागरिकों पर अत्याचार कर रहा है। ऐसे में उन्हें साझा संघर्ष के लिए संगठित होना अनिवार्य हो गया है। इस प्रकार के आंदोलनों द्वारा एक सशक्त आवाज उठाना आवश्यक है ताकि बांग्लादेश के हिंदुओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एकजुटता दिखाई जा सके। यह मार्च हिंदू-सिख एकता को प्रमोट करने के साथ-साथ बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक ठोस आंदोलन के रूप में उभरा है।