जेल में अवैध गतिविधियों और बंदी से पिटाई के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित
जेल में अवैध गतिविधियों और बंदी से पिटाई के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित
बिलासपुर, 5 नवंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सारंगढ़ उप जेल में बंदियों की पिटाई और अवैध गतिविधियों को लेकर मंगलवार को सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और विभु दत्त गुरु डिवीजन बेंच में सुनवाई। जिसमें प्रदेश सरकार की तरफ जेल डीजी से हलफनामे पर अब तक की कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।
वहीं एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करते हुए याचनाकर्ता को राहत दी है। सुनवाई के दौरान इस पूरे मामले में अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सरकार की तरफ से डीजी जेल ने शपथ पत्र में बताया कि जांच के लिए समिति बनाया दी गई है, और कुल 10 जेल कर्मियों में से 3 की विभागीय जांच पूरी हो गई है। वही 7 की जांच में गवाही चल रही है। हाई कोर्ट ने पूछा कि यह जांच कब तक पूरी हो जाएगी..? जिस पर बताया गया कि आरोपित जेलकर्मियों को उन्हें 15 दिन का नोटिस दिया गया है। मामले में जांच जल्द पूरी हो जाएगी। इस सुनवाई के दौरान बंदियों की ओर से उनके परिजनों ने हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई में बताया गया था कि सारंगढ़ उपजेल में वसूली के लिए टॉर्चर किया गया। नगद लेने के अलावा अलग अलग खातों में ऑन लाइन ट्रांजेक्शन कराया गया। हस्तक्षेप याचिकाकर्ता दीपक चौहान और दिनेश चौहान के अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने अपना पक्ष रखा और कहा कि, उनके पक्षकार और उनके परिवार के लोगों के बयान अलग-अलग जिलों में दिए जा रहे हैं, जिससे परेशानी हो रही है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने राहत देते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की मांग पर मामले में जांच अधिकारी को बयान बिलासपुर पहुंचकर लेने के निर्देश दिए हैं।
अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित
दरअसल हाइकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीजी जेल व पुलिस को खाता नंबर किनके हैं, इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आवेदकों को भी फटकार लगाई थी, जब वसूली की जा रही थी तो उच्च अधिकारियों से शिकायत नहीं कर आप इसको बढ़ावा दे रहे थे। आप लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं पुलिस महानिदेशक जेल से शपथ पत्र के माध्यम से अब तक पूरी कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।
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