खन्ना में मजदूरों का बवाल: 40 पैसे मजदूरी बढ़ोतरी को ठुकराया, धान खरीद ठप!
पंजाब में अनाज मंडियों में धान की खरीद जारी रखने के लिए आढ़तियों, शेलर मालिकों और मजदूरों की हड़ताल गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। चंडीगढ़ में एक अक्टूबर को हुई बैठक में कोई सार्थक समाधान नहीं निकलने के कारण यह आंदोलन और भी तेज हो गया है। हड़ताल कर रहे मजदूर सार्वजनिक सड़कों पर उतर आए हैं और एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी, खन्ना स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी आवाज़ें साफ कर रही हैं कि सरकार पिछले 13 सालों से उनके खिलाफ है।
गृह मंत्रालय के अंतर्गत अनाज मंडी लेबर यूनियन पंजाब के चेयरमैन दर्शन लाल ने बताया कि वर्ष 2011 में बादल सरकार द्वारा मजदूरी में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से उनकी मजदूरी में कोई वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय-समय पर मजाक करते हुए मात्र 2 या 5 पैसे की बढ़ोतरी करती है, जो संपूर्ण मजदूर वर्ग के लिए बहुत ही निराशाजनक है। वर्तमान में लोडिंग के लिए मजदूरों को केवल 1 रुपए 90 पैसे प्रति बोरी मिल रहा है, जबकि हरियाणा में यह दर 3 रुपए 20 पैसे है।
हाल ही में पंजाब सरकार ने मजदूरी में 40 पैसे की बढ़ोतरी की घोषणा की, जोकि मजदूरों के लिए अस्वीकार्य है। दर्शन लाल ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सभी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे आगे चलकर रेल और सड़क यातायात को बंद करने का विकल्प चुनेंगे। आलम यह है कि हड़ताल से सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित किए जाने के बाद, यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश तुली चंडीगढ़ पहुंचे, लेकिन शाम तक कोई वास्तविक चर्चा या समझौता नहीं हुआ। सीएम मान ने बैठक से मुकरते हुए तुली को वापस भेज दिया, जिससे हड़ताली मजदूरों में आक्रोश बढ़ गया। अंततः उन्होंने 40 पैसे की बढ़ोतरी का फैसला सुनाया, जिसे मजदूरों ने नकार दिया है।
दर्शन लाल का कहना है कि पंजाब की सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। अन्य राज्यों में किसानों और मजदूरों को उनकी मेहनत के अनुकूल मिल रही सुविधाओं के विपरीत, पंजाब में उनकी अवहेलना की जा रही है। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या मजदूरों की हड़ताल का अंत बिना किसी ठोस योजना के होगा।









