पराली की आग ने हरियाणा के 3 शहरों को बनाया गैस चैंबर, पंजाब में ऑरेंज अलर्ट!

हरियाणा में पराली के जलाने के कारण प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई है। खासकर जीटी रोड बेल्ट के क्षेत्रों जैसे पानीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र में हालात चिंताजनक हो गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, अकेले कुरुक्षेत्र में 15 स्थानों पर पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पूरे राज्य में यह संख्या बढ़कर 680 हो गई है। प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर के चलते पानीपत में एक्यूआई 500 के ऊपर पहुंच गया था, जबकि कुरुक्षेत्र और करनाल में भी ये आंकड़े क्रमशः 420 और 402 तक पहुंच चुके हैं। हालांकि, आस-पास की हवा चलने से पानीपत में थोड़ी राहत मिली है, जिससे प्रदूषण का स्तर कुछ हद तक कम हुआ है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, एक्यूआई 400 के स्तर पर सांस लेना दिन में 25-30 सिगरेट पीने के बराबर है। इसी तरह, 300-350 के बीच के AQI का मतलब है कि यह 15-20 सिगरेट के समान है। इसका परिणाम है कि अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। खासकर इन क्षेत्रों में आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।

बढ़ते प्रदूषण के बीच पंजाब के कई शहरों, जैसे अमृतसर और मंडी गोबिंदगढ़ में भी प्रदूषण का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां AQI क्रमशः 221 और 235 तक पहुंच चुका है। चंडीगढ़ में भी AQI 210 के स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि पराली जलाने की घटनाएं कुछ कम हुई हैं, लेकिन हवा न चलने के कारण धुएं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।

हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण लगाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। कृषि विभाग ने विभिन्न किसान पर कार्रवाई की है और उन्हें जुर्माना भी लगाया है। हिसार के डीसी प्रदीप दहिया ने कहा है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रति एकड़ किसान को 1000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके लिए किसानों को 30 नवंबर तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब सरकारों को इस मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट का कहना है कि किसानों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए, और आवश्यकतानुसार FIR भी दर्ज की जानी चाहिए। यह स्पष्ट है कि यदि सही समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। चिकित्सकों का मानना है कि वायु प्रदूषण को लेकर हमें अभी से जागरूकता और सख्ती से कदम उठाने की आवश्यकता है।