गुरदासपुर: डीसी-कांग्रेस नेता विवाद में बवाल, रंधावा ने लोकसभा स्पीकर से की कार्रवाई की मांग!
पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित लघु सचिवालय के डीसी कार्यालय में हाल ही में कांग्रेस के नेताओं और जिला प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक गंभीर टकराव देखने को मिला। इस घटना में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर डीसी उमा शंकर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रंधावा ने आरोप लगाया है कि डीसी ने उनके साथ बदसलूकी की और इस मामले को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है, जिसमें नेता डीसी पर नाराजगी जताते हुए नजर आ रहे हैं।
गुरदासपुर के डीसी उमा शंकर गुप्ता ने इस संघर्ष के बाद एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मामला अधिक बढ़ा-चढ़ा कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब कांग्रेस के नेता उनके कार्यालय में आए थे, तब उन्होंने उन्हें चाय पिलाकर विदा किया था। गुप्ता का कहना है कि इस विषय को राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के नेता, जिनमें सांसद सुखजिंदर रंधावा और नेता प्रताप सिंह बाजवा शामिल थे, डीसी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। लेकिन डीसी ने केवल तीन नेताओं से ही बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की, जिस पर अन्य कांग्रेस नेताओं ने नाराजगी जताई। इसके बाद से ही विवाद बढ़ गया और डीसी कार्यालय में गहमा-गहमी शुरू हो गई। सांसद रंधावा ने कहा कि यदि अधिकारियों में हिम्मत है तो उन्हें बाहर निकालकर दिखाएं।
कांग्रेस पार्टी के नेता इस बात के भी विरोध में हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार पंचायत चुनावों के दौरान कांग्रेस के उम्मीदवारों को ज़रूरी अनुमति पत्र (NOC) उपलब्ध नहीं करा रही है। इस वजह से कांग्रेस के उम्मीदवारों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके विरोध में वे डीसी कार्यालय के बाहर धरना भी दे रहे थे। धरने के दौरान जब नेताओं ने डीसी से मिलने की कोशिश की, तो उन्हें अंदर जाने से रोका गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
इस पूरे मामले में राजनीति के रंग भी देखने को मिल रहे हैं। कांग्रेस नेता इस मामले को अपने राजनीतिक हित में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। रंधावा सहित अन्य नेताओं का आरोप है कि मौजूदा सरकार उनके प्रयासों को विफल करने की कोशिश कर रही है। इस टकराव ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक माहौल में ठनातनी चल रही है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।









