चंडीगढ़ यूटी ने निगरानी दौरे पर सवाल खड़े किए: मंजूरी, खर्च और बजट कर रहे इंतजार!
चंडीगढ़ नगर निगम (एमसी) की वित्तीय परिस्थिति ने ताजा अध्ययन दौरे को लेकर यूटी प्रशासन में चिंताएं पैदा कर दी हैं। मेयर कुलदीप कुमार ने प्रस्तावित दौरे के लिए अनुमति मांगी है, जिसमें दक्षिण भारत के तिरुवनंतपुरम, कोच्चि और कन्याकुमारी जैसे नगर निगमों का दौरा करने की योजना है। इस दौरे का उद्देश्य इन नगर निगमों की सफल परियोजनाओं और कार्यप्रणालियों का अध्ययन करना है। हालांकि, यूटी प्रशासन ने दौरे के संभावित खर्च और बजट की उपलब्धता के संदर्भ में नगर निगम को स्पष्टीकरण मांगा है, जिससे साफ होता है कि वित्तीय तंगी के बावजूद ऐसे दौरे की आवश्यकता को लेकर संदेह बना हुआ है।
यूटी प्रशासन ने नगर निगम कमिश्नर को एक पत्र भेजते हुए पूछा है कि इस दौरे पर कुल खर्च कितना आएगा और क्या इसके लिए नगर निगम के पास बजट की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त, पत्र में दौरे में शामिल होने वाले पांच अधिकारियों के नाम भी मांगे गए हैं। यूटी प्रशासन ने इस बात पर चिंता जताई है कि जब नगर निगम विकास कार्यों के लिए आवश्यक फंड की कमी का सामना कर रहा हो, तब महंगे अध्ययन दौरे की अवधारणा कितनी उचित है।
वर्तमान में चंडीगढ़ नगर निगम गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। निगम नए विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी नहीं कर पा रहा है और ठेकेदारों के लंबित भुगतान भी नहीं कर सकता। इस बीच, कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करना भी निगम के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में, जब निगम के पास वित्तीय संसाधनों की बहुत कमी है, यूटी प्रशासन ने इस दौरे की अनिवार्यता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा किए गए अध्ययन दौरों की लागत भी किसी से छुपी नहीं है। उदाहरण के लिए, 2023 में पार्षदों ने गोवा जाकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था का अध्ययन किया, जबकि 2022 में इंदौर और नागपुर का दौरा किया गया, जहां बायो-मेथेनेशन प्लांट का अध्ययन किया गया। इसी तरह, 2019 में पार्षदों की एक टीम लेह की यात्रा पर गई थी, जिसका कुल व्यय 10 लाख रुपए था। 2017 में, 32 पार्षदों और अधिकारियों ने मुंबई, पुणे और विशाखापट्टनम में विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित अध्ययन दौरे पर लगभग 18 लाख रुपए खर्च किए थे।
सितंबर के पहले सप्ताह में मेयर कुलदीप कुमार ने दक्षिण भारत में नगर निगमों के दौरे के लिए यूटी प्रशासन को पत्र लिखा था। उन्होंने इस दौरे को विभिन्न नगर निगमों द्वारा अपनाए गए सफल कार्यक्रमों और नीतियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि एमसी के वार्षिक बजट 2024-25 में अध्ययन दौरे के लिए आवश्यक निधि का प्रावधान है। लेकिन, मौजूदा आर्थिक संकट को ध्यान में रखते हुए इस दौरे की स्वीकृति फिलहाल अनिश्चित स्थिति में है और यूटी प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण की मांग की है।
इस समस्त परिप्रेक्ष्य में, चंडीगढ़ नगर निगम और यूटी प्रशासन के बीच बढ़ी हुई संवाद की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है ताकि वित्तीय कठिनाइयों के समय में विकासात्मक दृष्टिकोण को आत्मसात किया जा सके।









