धान खरीद में देरी से नाराज किसान: आंबाला-दिल्ली हाईवे पर जाम और विरोध प्रदर्शन!
चंडीगढ़ के डेराबस्सी में आज किसानों ने धान की खरीद में हो रही देरी को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों के संगठनों के सदस्यों ने चंडीगढ़-अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर अपनी असहमति व्यक्त की। किसानों का आरोप है कि धान खरीद प्रक्रिया में विलंब के कारण उनकी फसल का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
इस प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के साथ हाईवे पर उतर आए, जिसके कारण लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफिक जाम गंभीर स्तर पर पहुँच गया। इस जाम के चलते यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, और कई लोग घंटों तक फंसे रहे। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी धान खरीद संबंधी मांगों को नहीं मानती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
किसानों का कहना है कि धान की फसल कटने के बाद खरीद प्रक्रिया में होने वाली देरी उनके लिए हानिकारक साबित हो रही है। कई किसानों ने कहा कि इस विलंब के कारण उनकी अगली फसल की तैयारी पर भी असर पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो सकती है।
प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन ने किसानों से अपील की कि वे हाईवे खोलें और यातायात को सुविधाजनक बनाने में सहायता करें। हालांकि, किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अडिग रहते हुए हाईवे से हटने से इनकार कर दिया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर त्वरित ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो वे अन्य प्रमुख मार्गों को भी जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासनिक टीम स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में लगी हुई है, लेकिन वर्तमान में हाईवे पर ट्रैफिक पूरी तरह से ठप है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं। इस समय प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए ताकि यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम किया जा सके। वास्तविकता यह है कि किसानों की समस्याएं गंभीर हैं और सरकार को उनकी मांगों को उचित तरीके से देखना चाहिए ताकि इस मुद्दे का समाधान हो सके।









