फॉरेंसिक जांच में देरी पर हाईकोर्ट नाराज, पंजाब-हरियाणा को फटकार, समयसीमा तय!

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में दोनों राज्यों की सरकारों को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल) की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए गठित समितियों की सिफारिशों को शीघ्रता से लागू किया जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एफएसएल में लंबित मामलों के कारण न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे समाज में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास की कमी आ रही है। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता, और इसलिए यह जरूरी है कि एफएसएल की रिपोर्टों को उच्चतम गुणवत्ता और सटीकता के मानकों के अनुरूप बनाया जाए।

कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि समय पर जांच और रिपोर्टिंग होने से अदालतों पर लादे गए बोझ का बोझ कम होगा, साथ ही जेलों में भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे जनता का न्याय व्यवस्था में विश्वास भी फिर से मजबूत होगा। यह निर्देश तब आया है जब अदालत ने यह महसूस किया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी और लेटेंसी के कारण कई मामलों में विलंब हो रहा है। एफएसएल की रिपोर्ट का तेजी से उपलब्ध होना न केवल न्याय के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे कानून व्यवस्था में भी सुधार होगा।

समितियों द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशों में एक प्रमुख सुझाव यह था कि एफएसएल के लिए एक पूर्णकालिक निदेशक और अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति की जाए। इसके अलावा, स्वतंत्र निदेशालय की स्थापना की जरूरत है ताकि फॉरेंसिक कर्मचारियों की कमी को दूर किया जा सके। इसके साथ ही, जांच अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता है, जिससे वे नवीनतम तकनीकों और प्रक्रियाओं से अवगत रह सकें। अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देते हुए, एफएसएल के बुनियादी ढांचे को भी सुधारने की बात कहीं गई है।

इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि पंजाब और हरियाणा सरकारों को न्याय प्रणाली में सुधार लाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। चूंकि फॉरेंसिक विज्ञान का महत्व बढ़ रहा है, इसलिए इसमें बेहतरी लाने के प्रयासों में तेजी लाना जरूरी है। कोर्ट ने भी यह कहा है कि अगर यह सुधार जल्दी किए जाते हैं, तो इससे न्यायपालिका में भीड़भाड़ कम होगी और इससे न्याय की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह सम्पूर्ण प्रणाली के लिए लाभकारी साबित होगा।

यदि सरकारें इन सिफारिशों को गंभीरता से लागू करती हैं, तो यह न केवल मामलों की सुनवाई में तेजी लाएगा, बल्कि न्याय प्रशासन में भी अधिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा। इससे लोगों की न्याय व्यवस्था में आस्था बढ़ेगी और वे निश्चिंत रहेंगे कि उन्हें उनका हक मिल सकेगा। इस प्रकार, न्यायालय का यह निर्देश व्यापक प्रभाव डाल सकता है और राज्य के नागरिकों के लिए एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।