अबोहर में नहर का कहर: खेत डूबे, सोलर पंप क्षतिग्रस्त, श्मशान की दीवार धराशायी!

अबोहर के गांव दलमीरखेड़ा में पिछले रात एक गंभीर घटना सामने आई जब कस्सी में कटाव होने के कारण सैकड़ों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी एक महीने के भीतर तीसरी बार कस्सी टूट चुकी है, जिसके चलते किसानों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीण किसानों ने नहरी विभाग के खिलाफ मध्य रात्रि में धरना देकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को उजागर किया।

गांव के किसानों का कहना है कि कस्सी के मोघे (नहर के किनारे) का आकार अत्यधिक बड़ा होने और पानी की अधिकता के कारण कटाव हुआ। इस कटाव के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ गई, जिससे उनके खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। इसके साथ ही, खेतों में लगाए गए सोलर सिस्टम की मशीनरी भी खराब होने लगी। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव की श्मशान भूमि की दीवार भी पानी के दबाव से टूट गई।

इस घटना के बाद नहरी विभाग के अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत पानी की निकासी करना शुरू किया और कटाव को भरने का कार्य आरंभ किया। हालांकि, किसानों की मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने नहरी विभाग से आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा की है, जिसमें कस्सी के मोघे का सही आकार दिया जाना, कटाव को मजबूती से भरना और नियमित सफाई का कार्य शामिल है।

किसान समझते हैं कि नहरी विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें बार-बार ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट से उबरने के लिए न केवल कृषि को नुकसान हो रहा है, बल्कि उनके जीवन-यापन पर भी संकट आ गया है। यदि स्थानीय प्रशासन ने जल्दी ही प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो अगले सीजन में किसान और भी अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

किसानों के इस उग्र आंदोलन ने नहरी विभाग को चेतावनी दी है कि उन्हें समस्याओं को हल करने में जल्दबाजी करनी होगी। इस घटनाक्रम ने अन्य किसानों को भी सतर्क कर दिया है और वे अपनी शिकायतों को लेकर नहरी विभाग के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हो रहे हैं। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विभाग इन गंभीर मुद्दों को हल कर सकेगा और किसानों को राहत प्रदान करेगा।