वर्धमान ग्रुप समेत 10 व्यापारियों की सनसनीखेज ठगी का खुलासा: कोरोना संकट ने किया मजबूर!

लुधियाना में वर्धमान ग्रुप के मालिक एसपी ओसवाल से हुई 7 करोड़ की ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। इन आरोपियों का गिरोह अन्य 10 बड़े व्यापारियों को भी अपने जाल में फंसाने की योजना बना रहा था। पुलिस ने गिरोह के दो मुख्य सदस्यों, अतनू चौधरी और आनंद कुमार चौधरी, को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। सभी आरोपी पश्चिम बंगाल और गुहाटी के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर कुलदीप चहल ने जानकारी दी कि इन ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर ओसवाल को डराने-धमकाने का काम किया था।

आरोपियों ने ओसवाल से जाली आधार पर 7 करोड़ की मांग की थी, यह कहते हुए कि उनके नाम पर कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति सील करने के आदेश हैं। यह सुनकर ओसवाल डर गए और उन्होंने बैंकों के जरिए आरोपियों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। ओसवाल द्वारा पैसे ट्रांसफर करने के कुछ घंटे बाद ही जब उन्होंने आरोपियों से दोबारा संपर्क करना चाहा, तो उनके सभी फोन बंद थे। इस पर ओसवाल को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस कमिश्नर के अनुसार, इन आरोपियों ने COVID-19 महामारी के दौरान खुद का कारोबार ठप हो जाने के बाद पहले 6 करोड़ का कर्ज चुकाने के लिए ठगी का रास्ता अपनाया। आरोपियों ने पिछले छह महीने में इस योजना को क्रियान्वित किया, जिसमें उन्होंने 9 सदस्यों को शामिल किया। उनमें से कुछ को वे सीबीआई, ईडी या पुलिस के अधिकारी बनाकर पेश करते थे, ताकि सामने वाले को शक न हो। पुलिस ने बताया कि ये सभी आरोपी कानून की समझ रखते थे और अंग्रेजी बोलने में कुशल थे।

पुलिस ने इस मामले में कई अहम सबूत भी जुटाए हैं। आरोपियों के पास से 3 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनके जरिए अन्य व्यापारियों को भी निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। इसके अतिरिक्त, लुधियाना के एक व्यापारी, रजनीश आहूजा, से भी आरोपियों ने 1 करोड़ की ठगी की थी। पुलिस अब इस मामले में स्थानीय बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी कर रही है, क्योंकि संदेह है कि वे भी इस ठगी में शामिल हो सकते हैं।

आरोपियों को पकड़ने के लिए लुधियाना पुलिस ने गुहाटी जाकर वहां की पुलिस की मदद से जांच शुरू की। पुलिस ने पता लगाया कि अतनु और आनंद के बैंक खातों के माध्यम से तकरीबन 5.25 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। इस मामले में अन्य फरार आरोपियों की पहचान भी की गई है, जैसे कि निम्मी भट्टाचारिया, आलोक रंगी, और गुलाम मनतोजा, जिन पर विभिन्न मामलों में जांच चल रही है। बताया गया है कि आने वाले समय में सभी फरार आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर लेगी।