हमीरपुर के पवई गांव में झिंझिया का आयोजन, तालाब में कंस वध का हुआ मंचन
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सरीला तहसील क्षेत्र के पवई गांव में रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर पारंपरिक झिंझिया का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत गांव के बड़े तालाब में दो दर्जन नावों और ड्रमों से बनाए गए मंचों पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्वांग और आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। देर शाम श्रीकृष्ण के जयघोष के बीच कंस वध का मंचन हुआ। इस दौरान कृष्ण और कंस के बीच हुए संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। तालाब किनारे लगे मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की।
पवई गांव की प्रधान आशा देवी व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामगोपाल ने बताया कि तालाब के पानी में लीला कराने की प्रथा सैकड़ों साल पुरानी है। गांव में झिंझिया का आयोजन शरद पूर्णिमा के अवसर पर सामूहिक रूप से करते हैं। तालाब के भीतर नावों और ड्रमों से मंच तैयार कर कृष्ण दरबार, कंस दरबार, पूतना, अघासुर, कालिया नाग, कृष्ण-बलराम, वकासुर और भैंसासुर सहित विभिन्न पौराणिक पात्रों के स्वांग प्रस्तुत किए गए। दोपहर से शुरू हुआ कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा। कंस वध के मंचन के दौरान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
ग्रामीणों के अनुसार, तालाब के किनारे सैमागुर बाबा का स्थान है। गुदरिया दाई के विवाह से जुड़ी मान्यता के आधार पर गांव में झिंझिया का आयोजन किया जाता है। ग्रामीणों का विश्वास है कि उनके पूर्वज देवताओं का विवाह भी इसी परंपरा के अनुसार हुआ था। वहीं, शरद पूर्णिमा की रात अमृत वर्षा होने की धार्मिक मान्यता भी इस आयोजन को विशेष बनाती है। परंपरा, लोक आस्था और पौराणिक प्रसंगों से जुड़े इस आयोजन को देखने के लिए दर्शकों की खासी भीड़ जुटी।










