नेपाल में निलंबित सशस्त्र पुलिस के अतिरिक्त महानिरीक्षक की बर्खास्तगी की सिफारिश
काठमांडू, 09 अक्टूबर । नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के अतिरिक्त महानिरीक्षक (एआईजी) वंशी राज दाहाल के खिलाफ जांच समिति ने पद के आचरण के विपरीत गतिविधियों में शामिल होने का निष्कर्ष निकाला है। समिति ने आज गृहमंत्री सुदन गुरुंग को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपते हुए सशस्त्र पुलिस नियमावली के तहत बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की सिफारिश की है।
दाहाल पर पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा का करीबी बताए जाने वाले बिचौलिये इनाम सापकोटा को राज्य से जुड़ी कुछ संवेदनशील सूचनाएं लीक करने का आरोप है। इसी मामले में गृह मंत्रालय ने पिछले सोमवार को उन्हें निलंबित कर जांच शुरू की थी। सशस्त्र पुलिस बल के एआईजी अञ्जनी कुमार पोखरेल की एक सदस्यीय जांच समिति ने गुरुवार को रिपोर्ट सौंपी।
रिपोर्ट में दाहाल का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने सापकोटा के साथ बातचीत होने की बात स्वीकार की है। सापकोटा फिलहाल काठमांडू परिसर की हिरासत में हैं। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों के बीच हुई बातचीत को भी रिपोर्ट में शामिल किया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, दाहाल के खिलाफ गंभीर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, “किस तरह की कार्रवाई की जाए, यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। हालांकि, आचरण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर बर्खास्तगी तक का प्रावधान होने के कारण उसी के अनुरूप कार्रवाई की सिफारिश की गई है।”
गृह मंत्रालय शुक्रवार को दाहाल से स्पष्टीकरण मांगकर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। सशस्त्र पुलिस नियमावली के तहत उनके खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाए, इसका अधिकार गृह मंत्री को दिया गया है
27 सितंबर को काठमांडू क्राइम ब्रांच की पुलिस ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को हिरासत में लेकर जांच की थी। इसके बाद एआईजी दाहाल ने सापकोटा के माध्यम से राणा को विभिन्न सूचनाएं भेजी थीं। राणा उनके रिश्तेदार हैं।
सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि अपने रिश्तेदार की मदद करने के लिए दाहाल ने राज्य के साथ विश्वासघात किया। इसके बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर मामले की जांच शुरू की गई।
दाहाल के खिलाफ सशस्त्र पुलिस नियमावली के नियम 113 के तहत कार्रवाई होने की संभावना है। इस नियम में सेवा से हटाने और बर्खास्त करने का प्रावधान है। वहीं, नियम 115 के अनुसार, एआईजी को विभागीय सजा देने का अधिकार गृह मंत्री को है।
नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल में पहली बार किसी एआईजी के खिलाफ गृह मंत्री के स्तर से विभागीय कार्रवाई किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ नेपाल सरकार यानी मंत्रिपरिषद में अपील करने का प्रावधान भी है। एआईजी दाहाल के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब उनकी सेवा अवधि एक वर्ष बढ़ाने की सिफारिश की गई थी।
सशस्त्र पुलिस बल में एआईजी का कार्यकाल चार वर्ष के साथ एक वर्ष बढ़ाने के प्रावधान के तहत अधिकतम पांच वर्ष तक हो सकता है। दाहाल का चार वर्ष का कार्यकाल 28 असोज को पूरा होने वाला है। सशस्त्र पुलिस मुख्यालय ने उनकी सेवा अवधि एक वर्ष बढ़ाने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भेजा था। हालांकि, गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अब उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सेवा अवधि बढ़ने की संभावना समाप्त हो गई है।










