जल जीवन मिशन से जुडे एसीबी केस में पूर्व अधिशाषी अभियंता को जमानत नहीं
जयपुर, 09 सितंबर । एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-2 ने जल जीवन मिशन से जुडे एसीबी केस में पीएचईडी के शाहपुरा खंड के तत्कालीन अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पीठासीन अधिकारी राजेश कुमार दडिया ने अपने आदेश में कहा की प्रकरण में अन्य लोगों के खिलाफ अनुसंधान लंबित चल रहा है। प्रकरण सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुडा हुआ गंभीर प्रकृति का है। ऐसे में मामले में इस स्तर पर आरोपित को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि वह विभाग के शाहपुरा खंड में अधिशाषी अभियंता के तौर पर कार्यरत था। अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने 4 अप्रैल, 2023 को पत्र लिखकर उसे ठेका फर्म के अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन करने को कहा गया। जिसकी पालना में उसने केरल के विभिन्न स्थानों पर जाकर इरकोन इंटरनेशनल की ओर से गणपति ट्यूबवेज कंपनी के पक्ष में जारी अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन कर रिपोर्ट दी थी। जिसमें उसने यह नहीं कहा था कि प्रमाण पत्र फर्जी है या सही है। ऐसे में उसके किए गए काम में उपेक्षा हो सकती है, लेकिन इसमें उसका अपराध करने का आशय नहीं था और कार्य सदभाविक रूप से किया गया था। इसके अलावा समान तथ्यों के आधार पर सीबीआई में भी मामला दर्ज हुआ था। जिसमें उसे जमानत मिल चुकी है। प्रकरण में वह गत फरवरी माह से जेल में बंद है और केस में सरकारी पक्ष के 98 गवाह है। ऐसे में सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगेगा। इसलिए उसे जमानत दी जाए। जिसका विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक मंजुला जैन ने कहा कि आरोपी ने दूसरे लोगों से मिलीभगत कर अपने पद का दुरुपयोग किया और फर्जी प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया। ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।









