मप्र: किसान आंदोलन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने, सीजेपी भी किसानों के समर्थन में उतरी
भाेपाल, 29 जुलाई । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों के आंदोलन के बीच सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव भी तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार काे किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से रास्ता निकालना चाहती है। वहीं कांग्रेस ने इस पहल को पर्याप्त नहीं बताते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए किसानों की मांगों को जायज बताया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक संवाद के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि किसानों की समस्याओं पर चर्चा और समाधान के लिए मंत्रियों का एक दल गठित किया गया है, जो आंदोलनकारी किसानों से बातचीत करेगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता और मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय समय निकालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल समिति बना देने से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को सीधे किसानों से संवाद कर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र में पदयात्रा करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे रोकने या दबाने का प्रयास उचित नहीं है। उनके अनुसार सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों की हर जायज मांग के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार तथा किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग करती है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर हमला बोला। उन्होंने एक्स पर लिखा कि नर्मदापुरम के बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पदयात्रा राजधानी भोपाल पहुंच चुकी है और हजारों किसान परिवार अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अहंकार के कारण किसानों की आवाज सुनने से बच रही है। पटवारी ने कहा कि किसानों की उपेक्षा सरकार के लिए भारी पड़ सकती है और उनकी मांगों का सम्मानपूर्वक समाधान किया जाना चाहिए।
वहीं, किसान आंदोलन को अन्य संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने किसानाें का समर्थन करते हुए फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि भोपाल में किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। हजारों किसान अपनी प्रमुख मांगों को लेकर नर्मदापुरम रोड और वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं।
दिपके ने कहा कि सरकार और प्रशासन के साथ अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं और उनका कहना है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि मूंग की फसल की 100 प्रतिशत खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाए और खाद (उर्वरक) के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था और जाम के कारण आसपास के स्कूलों और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। सीजेपी की टीम पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और किसानों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।
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