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धर्म मानव जीवन में सुख,शांति और खुशहाली का मार्ग करता है प्रशस्त : कालीचरण मुंडा

खूंटी, 10 मई । मुरहू प्रखंड के डौगड़ा गांव में 16 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सरना धर्म प्रार्थना सभा रविवार को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न हो गई। समारोह में बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबियों ने भाग लिया और आगामी जनगणना में सामाजिक एवं धार्मिक एकता के लिए अधिक से अधिक लोगों से सरना धर्म दर्ज कराने का आह्वान किया ।

कार्यक्रम में धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय मुंडा एवं धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया की अगुवाई में सरना स्थल पर भगवान सिंगबोंगा की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान समाज में सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना की गई।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद कालीचरण मुंडा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक राम सूर्या मुंडा, धर्मगुरु विद्यासागर केरकेट्टा एवं जिला परिषद के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

धर्मगुरु विद्यासागर केरकेट्टा ने कहा कि सरना प्रकृति आधारित मानव सभ्यता का प्राचीनतम धर्म है, जिसकी अपनी धार्मिक परंपराएं, जीवन शैली और दर्शन हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में 50 लाख से अधिक लोगों ने सरना धर्म दर्ज कराया था और आगामी जनगणना में इसे दो करोड़ से अधिक तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सामाजिक और धार्मिक एकता बनाए रखने के लिए जनगणना में सरना धर्म दर्ज कराने का संकल्प लेने की अपील की।

मुख्य अतिथि सांसद कालीचरण मुंडा ने कहा कि धर्म मानव जीवन में सुख, शांति और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करता है। सिंगबोंगा की आराधना से मानव जीवन में श्रद्धा और भक्ति की भावना बढ़ती है, इसलिए सभी को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।

विधायक राम सूर्या मुंडा ने कहा कि सिंगबोंगा सर्वशक्तिमान हैं और समाज तथा मानव कल्याण के लिए उनकी पूजा-अर्चना आवश्यक है।

कार्यक्रम में बुधराम सिंह मुंडा, डॉ. सीताराम मुंडा, जिला परिषद सदस्य रमेश लुगुन, मुखिया लक्ष्मण टुटी, सोमरा मुंडू, धीरजु मुंडा, बेला मुंडरी, जमुना मुंडू, गोपाल बोदरा, करमु हेमरोम, बिरसा तोपनो, मथुरा कंडीर, गोपाल लुगुन, मधियाना धान, जीतनाथ पहान, कोलाय ओड़ेया सहित कई लोगों ने धर्म वचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

समारोह में खूंटी, रांची, मुरहू, बंदगांव, चक्रधरपुर, ओडिशा, राउरकेला, अड़की, कोचांग, बिरबंकी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबी शामिल हुए।