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झारखंड को एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित राज्य के रूप में आगे बढ़ाना प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

रांची, 21 अप्रैल । झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में कहा कि लंबे समय बाद बड़े पैमाने पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज आत्मनिर्भर होकर न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और 237 महिला पर्यवेक्षिकाओं सहित कुल 299 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभागीय सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक किरण कुमार पासी सहित कई अधिकारी, नवनियुक्त अभ्यर्थी और उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और हार्दिक बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी नवनियुक्त महिलाएं पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए सरकार नियमित और अनुबंध आधारित नियुक्तियों के माध्यम से विभिन्न वर्गों में कर्मियों की बहाली कर रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान देना है।

अपने संबोधन में उन्होंने कुपोषण की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि राज्य में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मियों से आह्वान किया कि वे मिलकर इस समस्या को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा, “कुपोषण समाज के लिए एक अभिशाप है, जिसे समय रहते खत्म करना बेहद जरूरी है, अन्यथा यह जीवनभर की चुनौती बन सकती है।”

सोरेन ने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहां गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद लोगों की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को साझा नहीं कर पातीं, जिससे छोटी समस्याएं भी गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में महिला कर्मियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी अब नवनियुक्त कर्मियों के कंधों पर है। एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण उनके प्रयासों पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। मजबूत इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय और कनेक्टिविटी बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग को आंगनबाड़ी सेविकाओं, सीडीपीओ और महिला पर्यवेक्षिकाओं के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करना चाहिए और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि बेहतर तालमेल और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए विभाग से जुड़े प्रखंड और ग्रामीण स्तर के महिला कर्मियों को मोबाइल फोन और टैब उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।