गलत वेतन भुगतान की रिटायरमेंट के बाद वसूली आदेश रद्द
प्रयागराज, 13 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिशासी अभियंता मध्य गंगा नहर निर्माण खंड बुलंदशहर को सेवानिवृत्त याचियों के परिलाभों से की गयी लाखों रुपये की कटौती राशि एक माह में वापस करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि तय समय में भुगतान नहीं किया तो 70 फीसदी ब्याज देना होगा।
कोर्ट ने सरकार को छूट दी है कि यदि याची ने गलत बयानी कर आदेश प्राप्त किया है तो वह दो माह के भीतर इस आदेश को वापस लेने की अर्जी दे सकेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सतीष कुमार व किरणपाल सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याचियों के देयों से क्रमशः 8,29,890 रूपये व 12,57,370 रूपये कटौती करने के अधिशासी अभियंता के 16 जनवरी 26 को पारित आदेश को रद्द कर दिया है।
याची का कहना था कि गलत वेतन निर्धारण के कारण अधिक भुगतान किया गया। जिसमें याची की कोई भूमिका नहीं रही है। विभाग अपनी गलती का दंड याचियों को नहीं दे सकता। वसूली आदेश सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस के फैसले का खुला उल्लंघन है। जिस पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।









