उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चैती छठ का समापन
काठमांडू, 25 मार्च । उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए चैती छठ पर्व विधिवत सम्पन्न हो गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने पूजा सामग्री के साथ कल शाम अस्त होते सूर्य और आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद चैती छठ पर्व का समापन किया।
कार्तिक में मनाए जाने वाले छठ पर्व जितनी बड़ी संख्या में लोग चैती छठ नहीं मनाते, फिर भी हर वर्ष इस पर्व को मनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
चार दिन तक अत्यंत श्रद्धा और नियम के साथ मनाए जाने वाले चैती छठ के पहले दिन ‘नहाय-खाय’ किया जाता है, दूसरे दिन दिनभर उपवास रखकर रात में केवल गुड़ से बनी खीर खाने की परंपरा है।
तीसरे दिन यानी षष्ठी तिथि को निर्जला उपवास रखा जाता है और शाम को अस्त होते सूर्य को तथा चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को जलाशय में स्नान कर खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य में ठेकुआ, भुसुआ, मूली, गन्ना, बैंगन, केला, नारियल आदि सामग्री प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं। मान्यता है कि चैती छठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और त्वचा संबंधी रोग नहीं होते।









