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कलराज मिश्र ने अजीत पवार के निधन पर जताया शोक, यूजीसी की नई गाइड लाइन को बताया संविधान विरोधी

लखनऊ, 28 जनवरी । भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार काे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के प्रभावशाली जननेता अजीत पवार के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिवंगत नेता आम जनता से गहराई से जुड़े हुए थे और संगठनात्मक दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे। बारामती उनका निवास स्थान था और आज सुबह उनका आकस्मिक निधन हो जाना अत्यंत दुखद है। कलराज मिश्र ने इसे अपूर्णीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को यह आघात सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील विषय पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जनवरी 2026 में जारी इक्विटी प्रमोशन इन यूनिवर्सिटी एंड हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस-2026 को लेकर देशभर में बढ़ रहे आक्रोश पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर जो गाइडलाइन बनी थी, उसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में व्याप्त वास्तविक भेदभाव की शिकायतों का समाधान करना था। लेकिन,नई गाइडलाइन न केवल विचित्र है, बल्कि संविधान में प्रदत्त नागरिकों के मौलिक अधिकारों के भी विपरीत है।

जातिगत विभाजन की आशंकाकलराज मिश्र ने कहा कि एससी-एसटी से जुड़े प्रावधानों का एक ऐतिहासिक और संवैधानिक आधार रहा है, लेकिन ओबीसी को जोड़ने के बाद यह प्रश्न उठता है कि यदि भेदभाव होता है तो सभी वर्गों के लिए समान प्रावधान क्यों न हों। उन्होंने आशंका जताई कि यह व्यवस्था एक नए प्रकार के जातिगत विभाजन को जन्म दे रही है, जिससे शैक्षणिक परिसरों में सवर्ण समुदाय को टारगेट किए जाने की भावना पैदा हो रही है।

यूजीसी का नियम अनुच्छेद 14, 15 और 21 के विपरीतउन्होंने कहा कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (जाति के आधार पर भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (गरिमा व मानसिक स्वतंत्रता) के विपरीत है। छात्रों के बीच डर, संदेह और निरंतर निगरानी का वातावरण बनना शिक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।

झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान जरूरीकलराज मिश्र ने झूठी शिकायतों के मुद्दे को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि आंकड़ों में शिकायतों की संख्या बढ़ने की बात कही जा रही है,लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इनमें कितनी शिकायतें फर्जी थीं। यदि झूठी शिकायतें की जा रही हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक प्रावधान क्यों नहीं हैं। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

‘विश्वविद्यालय बिरादरी नहीं, विद्यार्थियों का साझा परिसर है’उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय किसी बिरादरी का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का साझा परिसर होते हैं, जहां सभी छात्र समान होते हैं। जातिगत पहचान को प्रमुखता देकर समितियां बनाना मानसिक एकता को तोड़ने वाला कदम है। छात्र जीवन में मित्रता जाति नहीं देखती, लेकिन यह नियम उसी भावना को कमजोर करता है।

इक्विटी अपॉर्च्युनिटी सेंटर की संरचना संदेह के दायरे मेंइक्विटी अपॉर्च्युनिटी सेंटर और शिकायत निवारण समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व नहीं है और न्यूनतम कोरम जैसी व्यवस्थाएं भी संदेह के दायरे में हैं।

लिखित आपत्तियां सौंपी,यूजीसी नियम तत्काल वापस लेने की मांगकलराज मिश्र ने बताया कि उनके नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित केंद्रीय मंत्री को इस विषय में लिखित रूप से आपत्तियां सौंप दी है और नियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आश्वासन मिलने की बात भी कही कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

यूजीसी नियम वापस नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक विरोध होगाअंत में पूर्व राज्यपाल ने कहा कि यदि यह नियम वापस नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के लक्ष्य को तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब समाज में किसी भी प्रकार के अलगाव की भावना को बढ़ावा न दिया जाए। उन्होंने चेताया कि यह नियम यदि जारी रहा तो सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।