अस्पताल मानवता और करुणा का मंदिर भी होता है : राज्यपाल

राज्यपाल मंगलवार को एम्स देवघर के छठे वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक संस्थान का वार्षिकोत्सव मात्र नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण और संकल्प की उस यात्रा का उत्सव है, जिसने स्वास्थ्य और आशा की नई किरण जगाई है। उन्होंने 31 जुलाई, 2025 को राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न प्रथम दीक्षांत समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि वह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प लेने का क्षण भी था। यह गौरव केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखण्ड के लिए भी था।

राज्यपाल ने कहा कि 270 एकड़ में फैला यह परिसर एक 750 बेड वाला यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, जिसमें अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, डायग्नॉस्टिक सेवाएं, उत्कृष्ट संकाय और शोध केंद्र हैं। यहां झारखंड के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि एम्स देवघर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को साकार कर रहा है और ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

राज्यपाल ने कहा कि अब तक ओपीडी सेवाओं के तहत सात लाख से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है, जो कि इस संस्थान की जनसामान्य तक पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत गाँवों को गोद लेना और जन औषधि केंद्र जैसी पहलें संस्थान की सामाजिक दायित्व की दिशा में सार्थक पहल है।

राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में एम्स देवघर देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों की श्रेणी में स्थान बनाएगा और राज्य के लोगों को गंभीर बीमारियों के लिए अन्य महानगरों में नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफेद कोट केवल परिधान नहीं, सेवा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा की शपथ है। आपकी संवेदनशीलता और आपकी निष्ठा ही इस संस्थान की वास्तविक पहचान बनेगी।

इस अवसर पर राज्यपाल ने एक्स-रे 1000 एमए, 128- स्लाइस सीटी स्कैन तथा कार्डियक कैथेटेराईजेशन प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया।