फोटो से अपहरण: 1760 KM दूर बंगाल की खाड़ी में यूपी पुलिस का सनसनीखेज ऑपरेशन!

उत्तर प्रदेश की हाथरस पुलिस ने एक इंटरस्टेट बच्चे चोर गैंग का पर्दाफाश किया है, जो एक संगठित तरीके से बच्चों की चोरी और बिक्री का धंधा कर रहा था। इस गैंग की कार्यप्रणाली अत्यंत सुनियोजित थी। शुरुआत में, बालक की मांग की जाती थी, इसके बाद निशाने पर रखे गए बच्चे की फोटो खरीदार को भेजी जाती थी, जिससे वह पसंद कर सके। जब पैसे का लेनदेन तय हो जाता था, तब बच्चे को चोरी कर लिया जाता था। इस गैंग का संबंध अनेक अस्पतालों में वार्ड बॉय और नर्सों से भी पाया गया है, जो उन्हें ग्राहक मुहैया कराते थे। अब तक इस गैंग के नेटवर्क का पता 7 राज्यों में चला है और 8 बच्चों को चुराकर बेचने की बात सामने आई है।

हाथरस पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि वे आंध्र प्रदेश की स्थानीय भाषा, तेलुगू का ज्ञान नहीं रखते थे। इसलिए, पुलिस अब जेल में बंद आरोपियों को जल्द रिमांड पर लेकर ट्रांसलेटर के माध्यम से पूछताछ करने का प्लान बना रही है। इस गैंग के काम करने की प्रक्रिया और कैसे वे बच्चे की कीमत तय करते थे, यह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।

पूरे मामले की शुरुआत हाथरस के जागेश्वर कॉलोनी से हुई, जहाँ प्रिंस गोस्वामी का 3.5 साल का बेटा, कविश, 9 मई को खेलते खेलते लापता हो गया। पुलिस ने मामले में मोनू पाठक और उसकी पत्नी नेहा को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पाया गया कि मोनू पाठक ने कविश को चोरी करने के लिए अपनी योजना बनायी थी। हाथरस पुलिस ने CCTV फुटेज की मदद से इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इंस्पेक्टर गिरीश चंद्र ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि बच्चा खेलते खेलते कहीं चला गया होगा। लेकिन जब काफी देर हो गई, तो उन्होंने CCTV फुटेज देखना शुरू किया। फुटेज में मोनू पाठक बच्चा लेकर जाते दिखे। जांच में पता चला कि वे फिर बच्चा लेने के बाद आगरा चले गए और वहाँ से आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा पहुंचे। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद इन दोनों को पकड़ लिया और उनके पास से बालक भी उन्हें प्राप्त हुआ।

इस गैंग के संचालकों का कहना है कि बच्चों की कीमत उनकी उम्र और सुंदरता के आधार पर तय की जाती थी। एक 3.5 साल के बच्चे की कीमत 1 लाख 80 हजार रुपए रखी गई थी। जबकि ग्राहक की क्षमता के अनुसार बच्चे का दाम 1 लाख से 5 लाख रुपये तक हो सकता था। पुलिस ने इस गैंग के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क के बारे में और भी जानकारी हासिल की है।

इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू है मोनू पाठक की सास का जेल में रहना। उसकी सास ने भर्ती हुई एक महिला से मिले सुझाव के आधार पर बच्चे चोरी करने के धंधे में सेंधमारी करने का विचार किया। इस तरह, मोनू और नेहा ने एक आर्थिक संकट में आकर इस अनैतिक कृत्य का हिस्सा बनने का निर्णय लिया।

कविश के माता-पिता, खासकर प्रिंस, इस घटना से बहुत दुखी हैं। प्रिंस का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं था कि मोनू जैसे करीब के मित्र ने ऐसा किया। परिवार के बीच गहरे संबंध थे, जिससे यह घटना और भी चौंकाने वाली हो गई। अब पुलिस जांच कर रही है कि यह गैंग किस तरह से पूरे नेटवर्क को चलाता था और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।