कोटा में अमेरिकी नागरिक के खिलाफ धर्म-परिवर्तन का संगीन आरोप, ससुर निकला साजिशकर्ता!
कोटा के कैथून क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि भीलों की टापरियां में ईसाई मिशनरी कुछ भील समाज के लोगों का धर्मांतरण कर रही हैं। इस प्रयास के तहत अमेरिका से कुछ मिशनरी को बुलाया गया है। जब हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया, तो पुलिस ने गांव में होने वाले एक सामूहिक भोज पर छापा मारा। पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक को मौके से गिरफ्तार किया, जिसके बाद खुफिया एजेंसियां इस मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप लगाया गया कि इस सामूहिक भोज के माध्यम से भील समाज के लोगों को ब्रेनवॉश किया जा रहा था। उन्हें मांसाहारी भोजन परोसा गया, और ईसाई धर्म का प्रतीक क्रॉस पहनाया गया। लेकिन जब हमारी रिपोर्टिंग टीम मोतीपुरा गांव पहुंची, तो गांव के लोगों ने इस आरोप को खारिज किया। मुखिया चौथमल ने कहा कि भोज में दाल, बाटी, आलू की सब्जी और चावल तैयार किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जॉय मैथ्यू, जो ईसाई मिशनरी से संबंधित है, ने अपने खेत में भोज का आयोजन करवाया था और सभी आवश्यक सामग्रियां भी गांव में ही तैयार की गई थीं।
गांव के लोगों ने यह भी बताया कि जॉय मैथ्यू पिछले तीन साल से उनकी मदद कर रहा है, जिसमें राशन सामग्री का वितरण भी शामिल है। इसके तहत गांव के घरों में सामग्री वितरण के अलावा मकानों की मरम्मत का कार्य भी करवाया गया है। चौथमल ने कहा कि वह खुद माता के मंदिर में सेवक का काम करते हैं और धर्म परिवर्तन के विषय पर सोचने की बात भी नहीं है। उनके अनुसार, मैथ्यू उनके लिए एक सहयोगी की तरह है, जिसने उनकी आर्थिक मदद की है।
हालांकि, पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और जॉय मैथ्यू के दामाद कोलीन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कोलीन पर पहले भी गांव में आने का आरोप है, जब उसने भील समुदाय को राशन और अन्य सहायता का आश्वासन दिया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि जॉय मैथ्यू ने पिछले एक साल से गांव में अभियान चलाया था, जिसमें वह लोगों की मदद कर रहा था। ऐसे में अब यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उसके पीछे कौन सी योजनाएं थीं और क्या वास्तव में धार्मिक उद्देश्य था या फिर केवल सामाजिक सहायता का मामला है।
कैथून थाने के अधिकारी संदीप कुमार शर्मा ने बताया कि इस मामले में वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस की प्राथमिक जांच में पाया गया कि विदेशी नागरिकों ने बिना किसी अनुमति के गांव में भोज का आयोजन किया, जो कानून के खिलाफ है। जॉइंट इन्वेस्टिगेशन सेल इस मामले की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।
इस घटना ने कोटा में धर्मांतरण से जुड़े विभिन्न मामलों की याद दिलाई है, जिन्हें पहले भी समाज में लेकर आंजित किया गया है। यह स्थिति उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो समाज में धार्मिक सहिष्णुता और स्वाभिमान की भावना को संवर्धित करने के लिए प्रयासरत हैं। अब देखना होगा कि पुलिस और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट क्या सामने लाती है और इस मामले का निष्कर्ष क्या होता है।









