कृषि बस्तर के समग्र विकास की धुरी : कृषि उत्पादन आयुक्त
कृषि बस्तर के समग्र विकास की धुरी : कृषि उत्पादन आयुक्त
कोंडागांव, 22 अप्रैल (हि.स.)। विकसित बस्तर की परिकल्पना को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र सहित आनुशांगिक सेक्टरों की अहम भूमिका है, यह बस्तर के समग्र विकास की धुरी है। यह बात कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने आज मंगलवार को कोंडागांव में आयोजित संभाग स्तरीय रबी-खरीफ फसल की तैयारी हेतु समीक्षा करते हुए कही।
उन्होंने खरीफ 2025 के कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल देते हुए नियमित तौर पर समीक्षा किए जाने के निर्देश कलेक्टर्स तथा अन्य अधिकारियों को दिए। इस दौरान कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह ने बस्तर संभाग में कृषि विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कृषि एवं आनुशांगिक सेक्टरों में संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं से हरेक पात्र व्यक्ति को सेचुरेशन करने पर बल देते हुए इस दिशा में सभी अधिकारियों को बेहतर प्रदर्शन करने के निर्देश दिए।
बैठक में कांकेर, दंतेवाड़ा, कोण्डागांव, सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर के कलेक्टर तथा सीईओ जिला पंचायत बस्तर ने अपने जिले में कृषि तथा संबंधित विभागों के योजनाओं के क्रियान्वयन प्रगति, खरीफ फसल कार्यक्रम कार्ययोजना के क्रियान्वयन तैयारी सहित नवाचारों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बस्तर में जैविक खेती की अपार सम्भावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां की भूमि की उर्वरता और वातावरण जैविक खेती के लिए काफी अनुकूल है। इसलिए अधिकाधिक किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें हरसम्भव मदद सुलभ कराया जाए।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने नेशनल मिशन आन एडिबले ऑयल की कार्ययोजना को व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन करने पर बल देते हुए कहा कि बस्तर के उच्चहन भूमि तथा अनुकूल जलवायु ऑयल पाम की खेती के लिए काफी मुनासिब है। किसान ऑयल पाम की खेती के साथ पामा रोजा एवं लेमनग्रास की इंटर क्रॉपिंग भी कर सकते हैं।
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