माधव विद्या निकेतन स्कूल में जगमग प्रकाश उत्सव का अद्भुत नजारा!

अमृतसर के माधव विद्या निकेतन स्कूल में नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस खास अवसर पर विद्यालय के एनसीसी इंचार्ज Arun Aroda ने गुरु जी के जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर में हुआ था। जहां उनका जन्म हुआ, वह स्थान आज ‘गुरू का महल’ और गुरुद्वारे के रूप में पहचाना जाता है।

गुरु तेग बहादुर जी ने न केवल अपने जीवन में महान कार्य किए बल्कि एक नई बस्ती का भी निर्माण किया, जिसको हम आज श्री आनंदपुर साहिब के नाम से जानते हैं। उन्होंने जनता को धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश दिया और अपने अंतिम समय में 24 नवंबर 1675 को हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस बलिदान के कारण उन्हें ‘हिन्द की चादर’ के उपनाम से भी जाना जाता है। उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत है और उन्होंने धर्म के प्रति अपनी पुरानी आस्था को जगाए रखा।

विद्यालय प्रबंधन की यह कोशिश रहती है कि वे विद्यार्थियों को हमेशा गुरुओं की वाणी से जोड़ें ताकि उनमें धर्म और नैतिक मूल्यों की भावना जागृत हो सके। इस प्रकार के आयोजन छात्र-छात्राओं में इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों को पहचान सके।

गुरु जी का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे अपने सिद्धांतों के लिए खड़ा रहना चाहिए और समाज की भलाई के लिए निस्वार्थता से काम करना चाहिए। इस समारोह में शामिल बच्चों ने गुरु जी के शिक्षाओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके ऊपर पद्य और कसीदे भी प्रस्तुत किए, जिससे उनकी कृतज्ञता को उजागर किया गया।

इस उत्सव के माध्यम से विद्यालय ने यह संदेश दिया कि गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए और समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित होना चाहिए। यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं था, बल्कि एक महत्वपूर्ण सबक था जो युवा पीढ़ी को सिखाता है कि कैसे हम अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं।