जवाहर कला केंद्र में वाद्य महोत्सव का धमाकेदार समापन, राग ‘पीलू’ और ‘जोग’ ने मोहा मन

जवाहर कला केंद्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वाद्य महोत्सव का समापन सितार और हारमोनियम की मधुर धुनों के साथ हुआ, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस विशेष मौके पर प्रसिद्ध संगीतज्ञ डॉ. विकास गुप्ता ने सितार पर लयबद्ध राग प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की, जबकि पं. राजेंद्र बनर्जी ने हारमोनियम के माध्यम से संगीत प्रेमियों को एक सुखद अनुभव प्रदान किया। महोत्सव के अंतिम दिन की शुरुआत डॉ. विकास ने संधि प्रकाश राग ‘पटदीप’ का आलाप लेकर की, जिसमें उन्होंने विभिन्न लयमालाओं जैसे कि आलाप, जोड़ और झाल का रस भी शामिल किया। इसके अंतर्गत तीनताल, जिसमें विलंबित और द्रुत रचनाएं भी शामिल थीं, का संगीतमय प्रदर्शन किया गया।

महोत्सव के दौरान डॉ. विकास ने राग ‘पीलू’ की भावनात्मक प्रस्तुति भी दी, जिसमें उन्होंने तीनताल और दीपचंदी ताल में रचनाएं पेश कीं। इस अद्भुत प्रस्तुति में तबले पर शैलेंद्र मिश्रा ने उन्हें संगीति प्रदान की, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी मधुर बन गया। डॉ. विकास के बाद पं. राजेंद्र बनर्जी ने हारमोनियम पर राग ‘जोग’ की प्रस्तुति की, जिसमें उन्होंने क्रमशः विलंबित, मध्यलय और द्रुत लय की बंदिशें पेश की। राग ‘जोग’ के माध्यम से उन्होंने अपनी कुशलता और गहराई को दर्शाया।

इसके उपरांत, पं. राजेंद्र ने राग ‘झिंझोटी’ में मध्यलय की बंदिश प्रस्तुत की, जो संगीत के प्रेमियों के दिलों को छू गई। कार्यक्रम का समापन दर्शकों को भावनात्मक रस में डुबोते हुए ‘हमरी अटरिया पे’ गीत के शास्त्रीय रूप से हुआ, जिसमें ऋषिप्रतिम बनर्जी ने हारमोनियम पर और स्वपनिल रावल ने तबले पर अपनी संगति दी। इस अद्भुत कार्यक्रम का मंच संचालन प्रणय भारद्वाज ने किया, जिसने पूरे आयोजन को कुशलता से प्रस्तुत किया।

इस महोत्सव ने केवल शास्त्रीय संगीत को दर्शाने का कार्य नहीं किया, बल्कि इसे एक संस्कृति के रूप में भी प्रस्तुत किया। यह आयोजन संगीत प्रेमियों और कलाकारों के लिए एक ऐसा मंच बना जहां शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को समझने और अनुभव करने का अवसर मिला। एक अद्वितीय समापन समारोह के रूप में, इस महोत्सव ने सभी उपस्थित लोगों के मन में संगीत प्रेम को और भी गहरा कर दिया। ऐसे आयोजनों का होने से न केवल कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की ओर आकर्षित करने में मदद मिलती है।