पान मसाला वाले मामले पर शाहरुख, अजय और टाइगर का कोटा कोर्ट में हलफनामा!

बॉलीवुड के तीन बड़े सितारे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने कोटा कंज्यूमर कोर्ट में विमल पान मसाला में केसर होने का भ्रमित प्रचार करने के आरोप में अपना जवाब प्रस्तुत किया है। इन सितारों ने सभी तथ्यों को अपने निजी ज्ञान और जानकारी पर आधारित बताते हुए दावा किया कि उनका बयान पूरी तरह से सच्चा है। उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग को इस मामले का निपटारा करने का अधिकार नहीं है। यह मामला तब उठा जब कोटा के सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता इंद्रमोहन सिंह हनी ने 13 नवंबर 2024 को इस संबंध में याचिका दायर की।

इस याचिका में इंद्रमोहन ने कहा कि विमल पान मसाला में केसर का विज्ञापन भ्रामक है, क्योंकि केसर का बाजार मूल्य लगभग 4 लाख रुपए प्रति किलो है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर पान मसाला का मूल्य मात्र 5 रुपए है, तो उसमें केसर होने का दावा कैसे किया जा सकता है? इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमल पान मसाला के निर्माताओं द्वारा इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया है। याचिका में चेतावनी के छोटे अक्षरों की भी आलोचना की गई है, जिन्हें पढ़ना संभव नहीं है।

इंद्रमोहन हनी ने कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश करते हुए विज्ञापन पर रोक लगाने की मांग की और आरोप लगाया कि यह विज्ञापन युवाओं को गुटखा खाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो कि उचित नहीं है। उन्होंने न्यायालय से यह भी अनुरोध किया कि अगर कोई कार्रवाई होती है, तो जुर्माने की राशि भारत सरकार के युवा मंत्रालय के युवा कल्याण कोष में जमा की जाए। हनी के अधिवक्ता विवेक नंदवाना ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कोर्ट में अभिनेता को पेश होने के लिए भी कहा है, ताकि एक आदर्श स्थापित किया जा सके और कोई सेलिब्रिटी देश के युवा वर्ग को गलत दिशा में प्रेरित न कर सकें।

वहीं, अभिनेताओं की ओर से प्रस्तुत जवाब में यह कहा गया है कि इस मामले को सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) द्वारा सुनने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तंबाकू-युक्त उत्पाद का प्रचार नहीं करते और उनके विज्ञापनों से युवा वर्ग भ्रमित नहीं हुआ है। इस विवाद ने सामजिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सारांश के तौर पर, यह मामला सिर्फ एक विज्ञापन का नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा है जो कि युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य और उनके मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अब देखते हैं कि इस मामले में न्यायालय के निर्णय से क्या परिणाम निकलता है और क्या ये बड़े सितारे अपनी प्रतिष्ठा को बचा पाते हैं।