13.71 करोड़ के मायरे में छाई शाही शादी: IITian को मिली गहने, गाड़ी और 1.31 करोड़ कैश!

नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र में दो व्यवसायी भाइयों ने अपने IITian भांजे की शादी में एक अद्भुत मायरा भरा है। यह मायरा 13.71 करोड़ रुपए की कुल धनराशि का है, जिसमें खूबसूरत ज्वेलरी से लेकर जमीन और वाहन तक शामिल है। रामलाल और तुलछाराम फड़ौदा, जो कि बेदावड़ी गांव के निवासी हैं, ने इस मायरे में 1.31 करोड़ रुपए थाली में रखे। इसके अलावा, 1.6 किलो सोने की ज्वेलरी, जो कि लगभग 1.5 करोड़ रुपए की कीमत की है, और 5 किलो चांदी के जेवर, जिसकी कीमत 11 लाख रुपए है, भी शामिल हैं।

इसके साथ ही, बेमिसाल मायरे में 80 बीघा ज़मीन का उपहार भी दिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 10.25 करोड़ रुपए है। मेड़ता शहर में 6 रेजिडेंशियल प्लॉट्स के अलावा एक बोलेरो और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी इस मायरे का हिस्सा है। कपड़ों और अन्य उपहारों का मूल्य 15 लाख रुपए है। यह आयोजन बुधवार को सुबह लगभग 11 बजे गांव शेखासनी में हुआ, जहाँ गाजे-बाजे के साथ परिवार के लोग पहुंचे। परिवारों के आगमन को देखने के लिए रिश्तेदारों và ग्रामीणों की भारी भीड़ एकत्र हुई।

राजूराम बेड़ा की पत्नी संतोष देवी के बच्चों की शादी के लिए भात भरने की यह रस्म थी। राजूराम, जो एक किसान हैं, का परिवार इस समारोह कामुख्य आकर्षण बना। मेड़ता कृषि उपज मंडी के व्यापारी ओमप्रकाश तेतरवाल ने बताया कि दोनों भाइयों ने अपनी बहन को मायरा में देने के लिए हाल ही में 80 बीघा ज़मीन खरीदी थी, जो इस परिवार की समृद्धि को दर्शाता है। यह न केवल एक विशाल दान है, बल्कि भाई-बहन के बीच के रिश्ते की गहराई को भी व्यक्त करता है।

मायरा का समारोह वास्तव में एक समृद्ध संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें ननिहाल पक्ष की ओर से बहन के बच्चों के लिए उपहार दिए जाते हैं। इसे भात भी कहा जाता है, जिसमें पैसे, कपड़े, गहने और अन्य उपहार शामिल होते हैं। यह रस्म ऐसे समय होती है जब किसी बहन के बच्चों का विवाह होता है। इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता भी है, जो नरसी भगत के जीवन से जुड़ी हुई है। नरसी भगत, जो जन्म से ही गूंगे-बहरे थे, ने अपनी भक्तियों के बल पर अपनी कठिनाइयों को पार किया और अपनी बेटी के विवाह के अवसर पर भात भरने की रस्म निभाई।

इस मायरे ने ना केवल नागौर जिले का नाम रोशन किया है बल्कि समाज में भक्ति और रिश्तों के महत्व को भी उजागर किया है। ग्रामीणों का मानना है कि यह मायरा ना केवल धनवानों की पहचान है, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की गहराई की एक मिसाल भी है। इस प्रकार का मायरा पहले कभी नहीं देखा गया है, जो कि एक नई परंपरा का जन्म देने का संकेत देता है।