उज्जैन सिंहस्थ में खर्च होंगे 3 हजार करोड़ से ज्यादा, 3 साल में 2 कुंभ का अनोखा आयोजन!
प्रयागराज महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद, अगले तीन साल में नासिक, उज्जैन, और हरिद्वार में अलग-अलग कुंभ और अर्धकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, जिसमें अखाड़ों और नागा संन्यासियों के दर्शन का अवसर श्रद्धालुओं को मिलेगा। हालांकि इन स्थलों पर प्रयागराज महाकुंभ की तरह विशाल जनसमूह उमड़ने की उम्मीद नहीं है, फिर भी स्थानीय सरकारें सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही जुट गई हैं। इस प्रयास का मुख्य कारण प्रयागराज महाकुंभ की विश्वव्यापी पहचान और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में मिला लाभ है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड की सरकारें इस दिशा में तैयारी कर रही हैं, जिसमें प्रयागराज में हुए महाकुंभ की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया है।
उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों पर चर्चा की जाए तो वहाँ हजारों सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे और लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन तैयारियों में प्रमुख रूप से सड़कों का निर्माण और ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। उज्जैन में महाकुंभ आयोजित करने के अनुभव से सीख लेकर, प्रदेश के अधिकारी अब सिंहस्थ कुंभ के सफल आयोजन के लिए जुट गए हैं। 2028 में 27 मार्च से 27 मई तक इस मेला का आयोजन होगा, जिसमें शाही स्नान की विशेष तिथियों पर करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
इसी संदर्भ में, प्रदेश के उच्चाधिकारियों ने कई बैठकें की हैं जिसमें उन्होंने निर्माण कार्यों की रफ्तार को बढ़ाने का निर्णय लिया है। शिप्रा नदी के किनारे नए घाटों का निर्माण किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान के लिए आसानी हो सके। लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों की व्यवस्था के साथ ही, सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। उज्जैन के कुंभ मेला क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 42,000 से अधिक जवानों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, नए पुलिस थाने और चौकियों का गठन भी किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।
नासिक और हरिद्वार के आयोजनों की भी तैयारी जोरों पर है। विशेष रूप से नासिक में कुंभ मेले को हाईटेक बनाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं की सराहना की और अपने गठन के साथ नासिक की दिशा में तैयारियों को गतिशीलता दी। हरिद्वार में 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होगा, जिसके लिए गंगा कॉरिडोर के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कवायद न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए है, बल्कि इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गहनता से कार्य हो रहा है। हाल के वर्षों में महाकुंभ के आयोजनों ने न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए, विभिन्न राज्यों के अधिकारी और मंत्री महाकुंभ के अनुभवों से सीखकर आगामी आयोजनों को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहे हैं।
उम्मीद है कि इन सभी आयोजनों में श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम अनुभव प्राप्त होगा और उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।









