महाकुंभ में नकली सामान की धूम: रुद्राक्ष से चंदन तक, जाली नोट गैंग गिरफ्तार!
महाकुंभ के दौरान 44 दिनों में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जिसके चलते प्रयागराज में एक बड़ा बाजार सज गया। इस बाजार में नकली सामानों की भरमार रही, जिसमें विशेष रूप से दिल्ली और कानपुर का नकली माल बड़ी मात्रा में बेचा गया। यहाँ तक कि पानी की बोतलें भी बिना किसी प्रमाण के लेबल के बिक रही थीं, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की सबसे आवश्यक वस्तु पानी भी ब्लैक में बेची जा रही थी। महाकुंभ के आरंभ से पहले प्रयागराज और श्रावस्ती में नकली नोटों के गिरोह के पकड़े जाने की खबरें आई थीं, जो महाकुंभ के समय में इन नोटों को खपाने की योजना बना रहे थे।
महाकुंभ की तैयारी में जुटे इन जालसाजों ने प्रयागराज में होने वाले मेले की भीड़ का लाभ उठाने का मन बना रखा था। जनवरी 2025 में होने वाले महाकुंभ को लेकर इन लोगों ने नकली नोट छापने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया था। इन गिरोहों में शामिल कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था, जिन्होंने इस बड़े घोटाले की योजना को स्वीकार किया। महाकुंभ के दौरान बेचे जा रहे नकली माल की जांच में पता चला है कि मेला प्राधिकरण ने उपलब्ध दुकानों की संख्या से कहीं अधिक दुकानों का संचालन किया गया है, जहां नकली ब्रांडेड सामान खुलेआम बिक रहा था।
हमारी एक टीम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खुद मौके पर जाकर इसकी पड़ताल की। हमारी रिपोर्ट में सामने आया कि विभिन्न दुकानों पर ऐसे सामान बिक रहे थे, जो असल में नकली थे। जैसे कि महाकुंभ में श्रद्धालुओं द्वारा खरीदी जाने वाली देसी घी, जिसमें वनस्पति घी और सस्ते तेल का मिश्रण मिलता था। दुकानदारों की बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि असली मिश्रण की कीमत बहुत अधिक होने के कारण ग्राहक सस्ते में असली सामान की तलाश में रहते हैं।
इसके अलावा, रुद्राक्ष और चंदन की बिक्री में भी धोखाधड़ी का खेल चल रहा था। दुकानदारों से हम बातचीत करके यह जानने में सफल रहे कि कई बार नकली माल बेचते वक्त उन पर एक खास सुगंध का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे ग्राहक धोखे में रहते थे। इसी तरह जूते-चप्पल और कपड़ों की नकल भी महाकुंभ के बाजार में धड़ल्ले से की जा रही थी। बड़े ब्रांड्स के नाम का इस्तेमाल कर सस्ते उत्पाद ग्राहकों को बेचे जा रहे थे, जहाँ असल कीमत में बड़ा अंतर होता था।
स्थानीय प्रशासन ने जब इस मामले पर प्रतिक्रिया दी, तो उन्होंने बताया कि एक विशाल मेले में हर दुकान की जांच करना संभव नहीं है। हालांकि, शिकायतें поступ रही हैं और इन पर विचार किया जा रहा है। महाकुंभ जैसे बडे आयोजन में सुरक्षा और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इस मामले में देखा गया कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में चुनौतियां भी हैं।
सामने आए इन मुद्दों ने मेला प्रशासन को एक बार फिर सोचने पर मजबूर किया है कि कैसे इस प्रकार की धोखाधड़ी से श्रद्धालुओं को बचाया जा सकता है और उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा की जा सकती है। महाकुंभ का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ सुरक्षित और पूर्ण अनुभव देना है, जो इन धोखाधड़ी गतिविधियों के कारण प्रभावित हो रहा है।









