दिल्ली कूच के फैसले पर आज अंतिम निर्णय: MSP की गारंटी पर किसान अडिग!

किसान आंदोलन से जुड़ी चिंताएं और गतिरोध जारी हैं। हाल ही में केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच चंडीगढ़ में आयोजित हुई छठी बैठक में कोई समाधान नहीं निकल पाया। यह बैठक ढाई घंटे तक चली और किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग के प्रति स्थिरता दिखाई। उन्होंने अपने दावों का समर्थन करने के लिए आंकड़े और तथ्य पेश किए। अब अगली बैठक का आयोजन 19 मार्च को चंडीगढ़ में किया जाएगा।

बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठक का माहौल सकारात्मक था। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को किसानों के सामने रखा और उनकी बातें भी सुनें। दोनों पक्षों के पास अपने-अपने आंकड़े हैं और यह तय किया गया है कि इन आंकड़ों की तुलना की जाएगी। इस क्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसियां जल्द ही किसानों से संबंधित डेटा को इकट्ठा करेंगी और 19 मार्च को नया सिरे से चर्चा होगी।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बैठक में चल रही स्थिति को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो किसान 25 फरवरी को दिल्ली कूच का कार्यक्रम निर्धारित करेंगे। किसानों ने पहले भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है कि जब तक सभी फसलों के लिए MSP की गारंटी नहीं मिलती, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

बैठक में शिवराज सिंह चौहान के साथ अन्य केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी और पीयूष गोयल भी मौजूद थे। उन्होंने किसान नेता डल्लेवाल से अनशन को समाप्त करने की अपील की, लेकिन डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि वे तब तक अनशन खत्म नहीं करेंगे जब तक कि केंद्र सरकार उनकी मुख्य मांग को स्वीकार नहीं करती।

किसान आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की बात करें तो हाल ही में हरियाणा पुलिस द्वारा शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग करने का आदेश दिया गया था, जिसके खिलाफ व्यापारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर बॉर्डर को खोलने का आदेश दिया है, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। दूसरी तरफ, किसान संगठनों ने कई बार दिल्ली कूच करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सफलतापूर्वक रोक दिया, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

इस बीच, किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने भी आमरण अनशन का निर्णय लिया, जिससे मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। उनकी सेहत को लेकर कोर्ट में कई बार सुनवाई भी हुई। हालाँकि, डल्लेवाल ने स्वास्थ्य संबंधी सहायता लेने से इनकार किया था, जिसके बाद केंद्र ने 14 फरवरी को बातचीत का प्रस्ताव दिया।

इस प्रकार, किसान आंदोलन के मुद्दे और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। किसान संगठन अपनी मांगों के प्रति अडिग हैं और आने वाले दिनों में उनकी स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।