हिट एंड रन मामले में युवक का 7वें दिन ऑपरेशन: व्यापारी ने संभाली पूरी जिम्मेदारी!

**जालंधर में हिट एंड रन केस के पीड़ित रिक्शा चालक का ऑपरेशन, आर्थिक मदद का स्वरूप**

जालंधर के कपूरथला चौक से वर्कशॉप चौक के बीच 29 जनवरी को हुए एक हिट एंड रन केस में 50 वर्षीय रिक्शा चालक सत्यनारायण का इलाज अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। इस मामले में सत्यनारायण को गंभीर चोटें आई थीं, जिनमें उनकी टांग की हड्डी दो स्थानों पर टूट गई थी। हादसे के बाद आरोपी कार चालक मौके से फरार हो गया, जिससे अब तक उसकी पहचान नहीं हो पाई है। इसके बाद सत्यनारायण को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी हालत ज्यादा गंभीर होने के कारण उन्हें पिम्स अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। यहां मंगलवार को उनका ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।

सत्यनारायण के इलाज का पूरा खर्च खेल उद्योग संघ ने उठाया है। यह संघ शहर के बस्ती नौ इलाके में स्थित है और इसके सदस्यों ने इस मामले में आर्थिक सहयोग देकर उनका इलाज कराने का निर्णय लिया। इस तरह की मानवता की मिसाल देने के पीछे इस संघ का मानना है कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे संकट में लोगों की मदद करें। सर्जरी के अलावा अस्पताल में रहने का खर्च भी व्यापारियों द्वारा दिया जाएगा, जो इस कठिन समय में सामने आए हैं।

ऐसे समय में जब सत्यनारायण का परिवार आर्थिक तौर पर कमजोर है, इलाज के लिए पैसा जुटाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। हालांकि, इस दौरान पुलिस में कोई शिकायत नहीं दी गई, जिसके कारण इस मामले की कोई सीसीटीवी फुटेज भी हासिल नहीं की जा सकी। खेल उद्योग संघ के कन्वीनर रविंदर धीर ने कहा कि सत्यनारायण पिछले कई वर्षों से रिक्शा चलाकर खेल सामान मार्केट में काम कर रहे थे, और उन्हें जब परिवार के संकट का पता चला तो वे तुरंत उनकी मदद के लिए आगे आए।

गौरतलब है कि श्री सत्य साईं सेवा समिति ने भी सत्यनारायण के लिए दवाओं का इंतजाम किया है, जिसकी सहायता से उन्हें बेहतर इलाज मिल सके। अस्पताल में उनके भर्ती होने के बाद संघ के कन्वीनर विजय धीर, सह कन्वीनर प्रवीण आनंद, और सह कन्वीनर रमेश आनंद सहित कई व्यापारी भी उनके देखने के लिए पहुंचे। इसके अलावा स्थानीय पार्षदों ने भी इलाज के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की, जिनमें तलविंदर सोई, प्रेम उप्पल, राजिंदर चतरथ, संदीप गांधी और साहिल बेदी शामिल रहे।

इस मामले में समुदाय की एकजुटता और परोपकार की भावना ने एक नई मिसाल कायम की है कि जब भी कोई संकट आता है, तो समाज के लोग एकजुट होकर अपने सहते हुए व्यक्तियों की मदद के लिए आगे आते हैं। यह घटना उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जो दूसरों की मदद करना चाहते हैं।