जालंधर में रिश्वत लेते JE और लाइनमैन की धड़पकड़, यूपीआई से ली थी एडवांस रकम!

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने जालंधर के भोगपुर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जूनियर इंजीनियर (JE) और लाइनमैन को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में जूनियर इंजीनियर मनजीत सिंह और लाइनमैन हरजीत सिंह शामिल हैं, जो कि पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के अंतर्गत कार्यरत थे। इस घटनाक्रम के संबंध में जालंधर रेंज विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर दी है और जल्द ही आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, बचाव भोगपुर के सुदर्शन पार्क एरिया के निवासी सुमीत वधवा ने विजिलेंस ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। सुमीत ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपियों ने उसके घर लगे पुराने मीटर को हटाने और नए मीटर की स्थापना के लिए 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इसमें से पहले ही 5 हजार रुपए यूपीआई के माध्यम से लिया जा चुका था, जबकि 5 हजार रुपए की दूसरी किस्त की मांग की जा रही थी। इस शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने जांच शुरू की, और एक योजना के तहत आरोपी को पकड़ने का निर्णय लिया।

विजिलेंस ब्यूरो की एक विशेष टीम, जिसका नेतृत्व सुखदेव सिंह कर रहे थे, ने जाल बिछाया। सरकारी गवाहों की मौजूदगी में, टीम ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथ उस समय पकड़ा जब वे रिश्वत की दूसरी किश्त लेने के लिए आए थे। यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए विजिलेंस ब्यूरो सक्रिय है।

इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दायर किया गया है। इस कार्रवाई से न केवल जालंधर में बिजली वितरण के क्षेत्र में पारदर्शिता का भाव बढ़ेगा, बल्कि यह अन्य संभावित भ्रष्टाचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश होगा। विजिलेंस ब्यूरो की ये कार्रवाइयाँ नागरिकों में विश्वास को मजबूत करेंगी और उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करेंगी।

यह घटना बताती है कि कैसे एक सामान्य नागरिक, जो भ्रष्टाचार के शिकार होते हैं, अपनी शिकायतों को लेकर आगे आ सकते हैं और सरकारी तंत्र की मदद से मजबूत कार्रवाई कर सकते हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अगर नागरिक जागरूक रहें और अपनी आवाज उठाएं, तो भ्रष्टाचार को रोकना संभव है। इस संदर्भ में, सुमीत वधवा की पहल एक सशक्त उदाहरण बन गई है, जो दूसरों को भी इस तरह के मामलों में बोलने के लिए प्रेरित कर सकती है।