फरीदकोट जल आपूर्ति में घोटाला: 4 अधिकारी निलंबित, फंड हेरफेर और फर्जी बिलों का मामला!
पंजाब सरकार ने फरीदकोट जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग में हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में कठोर कदम उठाते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) जसविंदर सिंह, उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) संदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता (जेई) परविंदर सिंह और वरिष्ठ सहायक तारा सिंह शामिल हैं। इन अधिकारियों पर आरोप लगा है कि उन्होंने रखरखाव के लिए आवंटित धनराशि का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल के माध्यम से अवैध भुगतान कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया।
इस घोटाले की शिकायत मिलने के बाद, विभाग ने मामले की गहनता को देखते हुए होशियारपुर के निगरान इंजीनियर से जांच करवाई। रिपोर्ट में इन अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई, जिसके चलते पंजाब के प्रमुख सचिव नीलकंठ एस अव्हाड ने कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन का कारण विभाग की प्रतिष्ठा को बचाना और सरकारी धन के दुरुपयोग की रोकथाम करना है।
निलंबन की अवधि के दौरान, एक्सईएन और एसडीओ को पटियाला स्थित मुख्य अभियंता (दक्षिण) कार्यालय में भेजा गया है, जबकि जेई और वरिष्ठ सहायक को मुख्य अभियंता (केंद्रीय) कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है। इस कदम का उद्देश्य न केवल जांच प्रक्रिया को सुरक्षित करना है, बल्कि विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी यह संदेश देना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के किसी भी रूप को सहन नहीं करेगी। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचें। इसके साथ ही, उन्होंने जनता से अपील की है कि वे ऐसे मामलों की सूचना दें, ताकि कोई भी दोषी व्यक्ति बच न सके और कानून का पूरी तरह से पालन किया जा सके।
यह मामला न केवल पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का संकेत है, बल्कि यह एक मजबूत संदेश भी देता है कि सरकारी धन और संसाधनों के दुरुपयोग के मामलों में सरकार किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतेगी। सरकार की इस पहल से आशा है कि अधिकारियों में जिम्मेदारी की भावना जाग्रत होगी और वे अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे।









