सेंट्रल पार्क भूमि घोटाला! डिप्टी सीएम के बेटे, 3 बीजेपी विधायकों का नाम भ्रष्टाचार रिपोर्ट में!

## मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार का ज़ुल्म, सेंट्रल पार्क मामला

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार का कद अब “महानायक” से भी ऊँचा हो गया है। उन्होंने यह उदाहरण देते हुए कहा कि यहां खुद अमिताभ बच्चन को निर्माण की अनुमति नहीं मिली, जहां “करप्शन की शूटिंग” लगातार हो रही है।

पटवारी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिष्ठित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट के जमीन आवंटन में भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए लिखा कि डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बेटे, पूर्व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह और भाजपा विधायक सुदेश राय समेत कई बड़े अफसरों की भी इस प्रोजेक्ट में जमीनें हैं। उन्होंने इस जमीन आवंटन के बारे में सार्वजनिक जानकारी के रूप में दस्तावेज भी जारी किए.

**आयकर विभाग की छापेमारी और शर्मा की 24 प्रॉपर्टी अटैच**

18 दिसंबर को आयकर विभाग ने भोपाल में त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा समेत अन्य बिल्डर्स के यहां छापा मारा था। उसी राजेश शर्मा का कुणाल बिल्डर्स के जॉइंट वेंचर सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में काम चल रहा है। छापेमारी में आयकर विभाग ने शर्मा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए, जिसमें सरकारी नियमों का उल्लंघन और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ।

इसके बाद आयकर विभाग ने शर्मा की 24 प्रॉपर्टी अटैच कर दी, ताकि वह इन प्रॉपर्टी को अपनी बोगस कंपनियों के जरिए औने-पौने दामों पर बेचने की कोशिश न कर सकें।

**सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में जमीन आवंटन की आशंकाएँ**

विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाए थे कि भोपाल के तालाब के ग्रीन बेल्ट में जहां लो डेंसिटी एरिया है, वहां कुणाल बिल्डर्स की जमीन है। उन्होंने बताया कि ये बिल्डर्स पिछले दस सालों से कई बार परमिशन के लिए आवेदन कर चुके थे, लेकिन लो डेंसिटी एरिया होने के चलते परमिशन निरस्त हो गई थी।
2021 में जैसे ही कुणाल बिल्डर्स ने सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट के डायरेक्टर राजेश शर्मा से एग्रीमेंट किया, तभी से लो डेंसिटी एरिया में ही जमीनों की धड़ाधड़ परमिशनें मिल गई। कटारे ने आरोप लगाया था कि इसी इलाके में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, उनकी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम से जमीनें खरीदी गई थीं।

**लाभ और भ्रष्टाचार की रंजक मिलीभगत**

इन सब के साथ ही आयकर जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश शर्मा की पत्नी राधिका का कोई बिजनेस नहीं है। फिर भी उनके नाम पर भोपाल में 16 प्रॉपर्टी मिली हैं। राधिका ने आयकर विभाग को स्वीकार किया है। विभाग का मानना है कि राजेश शर्मा ने अपने बिजनेस में पत्नी के नाम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी में निवेश किया और बाद में इनको राजनेताओं, कारोबारियों और ब्यूरोक्रेट्स को बेचने का काम किया।

इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष और जनता कांग्रेस नेताओं के आरोपों से बेहद गौरतम्य हैं तथा भाजपा सरकार के खिलाफ़ लगातार कई सवाल उठा रहे हैं। क्या कानूनी कार्रवाई के बाद इस भ्रष्टाचार काबू में आएगा या नहीं, यह देखना बाकी रह गया है।