पीएमएस फंड अटके, पंजाब विश्वविद्यालय के 639 छात्रों की डिग्री पर संकट!

पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के लगभग 693 छात्र, जो विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं, अपनी डिग्री के लिए इंतजार कर रहे हैं। यह समस्या मुख्य रूप से पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप (पीएमएस) फंड के जारी न होने के कारण उत्पन्न हुई है। पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को डिग्री केवल उस धनराशि के मिलन के बाद ही दी जाएगी, जो अभी तक बकाया है। इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है और यह ज्ञात नहीं है कि कब तक यह संकट समाप्त होगा। पीयू के कुल छह कॉलेजों में यह दिक्कत सामने आई है, जिसमें सरकारी कॉलेज होशियारपुर के 472 छात्र शामिल हैं।

पीयू के अधिकारियों ने बताया कि यह छात्र ज्यादातर 2017-18 और 2018-19 के बीच कॉलेज में नामांकित हुए थे। लेकिन धन की कमी के कारण उन्हें उनकी डिग्री अब तक नहीं मिल सकी है। आरक्षित श्रेणी के ये छात्र न केवल पढ़ाई में बल्कि भविष्य के रोजगार के लिए भी काफी परेशान हैं। पीयू के वकील यज्ञदीप ने इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी का नतीजा है और विद्यार्थियों को इसके कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, वर्ष 2016 में अनुसूचित जाति के छात्रों को बिना कोई फीस लिए दाखिला देने की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके साथ ही, छात्रों की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार को केंद्र से धन मिलना था। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि 11 कॉलेजों के छात्रों के लिए फंड अभी भी लंबित है। 4 नवंबर को हुई अदालत की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि वह जल्द ही पीयू को 2.7 करोड़ रुपए का बकाया फंड जारी करने जा रही है। इस रकम के वितरण के बाद छात्रों को उनकी डिग्री प्रदान की जा सकेगी।

अगली सुनवाई में अदालत को यह भी बताया जाएगा कि अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी क्या इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। यह पीएमएस फंड का मुद्दा लंबे समय से पंजाब विश्वविद्यालय के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। विश्वविद्यालय के सूत्रों का कहना है कि 2014-15 से 2019-20 के बीच पीयू के विभागों और क्षेत्रीय केंद्रों ने कुल 12.94 करोड़ रुपए की धनराशि का दावा किया था, जिसमें से महज 1.1 करोड़ रुपए ही उन्हें प्राप्त हुए हैं।

इस प्रकार, पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनके भविष्य और उच्च शिक्षा के अवसर इस वित्तीय संकट की गिरफ्त में हैं। उनकी डिग्रियों का रोकना न केवल उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी सीमित कर रहा है। यदि यह समस्या जल्द सुलझ नहीं पाई, तो छात्रों का भविष्य अंधकार में जा सकता है।