जगराओं के किसानों का अल्टीमेटम: 12 नवंबर को एसडीएम दफ्तर का घेराव तय!

जगराओं में भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल, जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहडका के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के समक्ष अपनी चिंताओं को रखा और मांग पत्र सौंपा। किसान नेताओं का कहना था कि पंजाब सरकार के आश्वासनों के बावजूद, अनाज मंडियों में धान की खरीद की प्रक्रिया अत्यंत धीमी हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मंडियों में धान की बोरियों का ढेर लग चुका है, जबकि बाहरी मंडियों से आ रहे धान को स्थानीय शैलरों में डालने का काम जारी है।

किसान नेताओं ने कहा कि शैलर मालिकों की कार्यशैली से उनकी परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि वे ट्रकों के पीछे मात्र दस बोरी धान ले जाते हैं, जबकि किसान अपने उत्पाद का सही मूल्य नहीं पा रहे हैं। इस मुद्दे पर फोकस करते हुए, किसानों ने यह भी बताया कि मार्केट कमेटी का मापक यंत्र धान को 17 पर नापता है, जबकि शैलर मालिकों का यंत्र इससे अधिक मात्रा में दिखा रहा है। इससे किसानों को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसान यूनियन के सदस्यों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शैलर मालिक अपनी नीतियों में सुधार नहीं करते हैं, तो वे उनके खिलाफ आंदोलन करेंगे।

जिला सचिव इंद्रजीत सिंह धालीवाल ने इस दौरान जिला फूड विभाग के अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया और बाहरी मंडियों से धान लाने की प्रक्रिया को रोकने की अपील की। किसानों ने अपने मांग पत्र में डीएपी की नियंत्रित आपूर्ति को सुनिश्चित करने की मांग भी की है, साथ ही यह भी कहा है कि जब सरकार ने पराली को प्रबंधित करने के लिए मशीनरी उपलब्ध नहीं कराई है, तो पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई करना उचित नहीं है।

किसानों का बेचारगी और बढ़ती समस्याओं को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय कौंसिल द्वारा कूड़े को उनके खेतों में फेंकने की स्थितियों को नहीं रोका गया, तो वे कौंसिल के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनके मुद्दों का समाधान नहीं होता है, तो 12 नवंबर को एसडीएम कार्यालय का घेराव करने की योजना है।

इस आंदोलन में शामिल हुए नेताओं में ब्लॉक अध्यक्ष तरसेम सिंह बसुवाल, ब्लॉक सचिव रछपाल सिंह नवांदल्ला तथा कई अन्य प्रमुख सदस्य शामिल रहे। किसानों का यह प्रयास न केवल उनके अधिकारों के लिए है, बल्कि यह भविष्य में बेहतर खरीद प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं।