दिल्ली स्कूल पर आतंकी पन्नू का हमला, कनाडाई डिप्लोमैट पर हिंदू आतंकवादी का आरोप!
खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने हाल ही में दिल्ली में स्थित व्हाइट लीफ पब्लिक स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व कनाडाई उच्चायुक्त संजय वर्मा के खिलाफ नारे लिखे हैं। इसको लेकर आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर इन नारों का श्रेय लिया है। पन्नू ने पीएम मोदी और वर्मा को “हिंदू आतंकवादी” कहकर संबोधित किया, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है। यह घटना तब सामने आई जब वर्मा ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि कनाडा ने भारत के साथ विश्वास तोड़ा है और खालिस्तानी आतंकवादियों का असर कनाडाई राजनीति पर बढ़ रहा है।
पन्नू का यह बयान वर्मा के उस इंटरव्यू के जवाब में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े आरोप भी राजनीतिक कारणों से प्रेरित थे। वर्मा ने कनाडा की संप्रभुता को चुनौती देते हुए खुद को सार्वजनिक विमर्श में शामिल किया था। पन्नू ने वीडियो में वर्मा को चेतावनी दी कि वे खालिस्तान समर्थक वातावरण में हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही पन्नू ने वर्मा के लिए 5 लाख डॉलर का बजट निर्धारित करने का भी ऐलान किया है, ताकि उन्हें अपने किए का सामना करना पड़े।
कुछ दिन पूर्व, पन्नू ने एअर इंडिया में बम विस्फोट की धमकी भी दी थी, यह कहते हुए कि यह 1984 के सिख दंगों का प्रतिशोध है। उसने लोगों से आग्रह किया कि वे एअर इंडिया में यात्रा न करें। 24 अक्टूबर को, पन्नू ने एक कनाडाई चैनल को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि उसे भारत से जान का खतरा है। उसने आरोप लगाया कि अमेरिका में उसकी हत्या की कोशिश की गई थी और निज्जर की हत्या का मामला भी खालिस्तान की मांग करने वालों को निशाना बनाकर किया गया।
इससे पहले, भारत सरकार ने पन्नू को 2019 में आतंकी गतिविधियों के चलते गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया था। तब से, एसएफजे पर बैन लगा हुआ है और इसके सदस्यों के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पन्नू पर आरोप है कि वह अलगाववाद को बढ़ावा देते हुए युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है। पन्नू और उसके संगठन के खिलाफ भारत में 15 से अधिक कानूनी मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई देशद्रोह के मामले भी हैं।
पन्नू सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है, जहां वह पंजाबी युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काने का कार्य करता है। वह अपने संदेशों के जरिए युवाओं को खालिस्तान के प्रति आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा, पिछले दिनों G20 मीटिंग के दौरान दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर खालिस्तानी नारे लिखवाने की जानकारी भी मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पन्नू अपने अलगाववादी एजेंडे को बढ़ाते हुए लगातार विरोध प्रदर्शनों को हवा दे रहा है। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार इस चुनौती का सामना कैसे करती है और खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को कैसे नियंत्रित किया जाता है।









